कोरोना में 10000 से शुरू किया कारोबार, आज इस महिला का सामान विदेशों तक पहुंचा
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Kanpur News: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज आपको एक ऐसी महिला की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने खुद की मेहनत से अपना कारोबार खड़ा किया ही, साथ ही दूसरों को भी रोजगार दिया. आइए इस महिला की सफलता की कहानी आपको बताते हैं.
कानपुर: कोरोना महामारी का समय जब पूरी दुनिया के लिए मुश्किलों से भरा था और लोग अपने घरों से बाहर निकलने से डर रहे थे, उसी दौर में कानपुर की अपूर्वा ने अपने सपनों को नया आकार देना शुरू किया. बेहद छोटी पूंजी और सीमित संसाधनों के साथ शुरू किया गया उनका काम आज करोड़ों रुपये के बड़े कारोबार में बदल चुका है.
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अपूर्वा की कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करना चाहती हैं. अपूर्वा ने न सिर्फ खुद सफलता हासिल की, बल्कि कई जरूरतमंद महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने का मौका दिया.
छोटी दुकान से शुरू हुआ कारोबार
अपूर्वा ने कोरोना महामारी के दौरान मात्र 10 हजार रुपए की पूंजी से अपना व्यवसाय शुरू किया. शुरुआत में उन्होंने एक चॉल में किराए की छोटी सी दुकान ली. यहीं से उन्होंने गोबर के दीये, मिट्टी की बोतलें और अन्य पर्यावरण अनुकूल सजावटी वस्तुएं बनाकर बेचना शुरू किया. धीरे-धीरे लोगों को उनके बनाए उत्पाद पसंद आने लगे. उनकी डिजाइन और गुणवत्ता ने ग्राहकों का भरोसा जीत लिया.
अपूर्वा ने कस्टमाइज गिफ्टिंग पर खास ध्यान दिया और ग्राहकों की जरूरत के अनुसार अलग-अलग तरह के गिफ्ट आइटम तैयार करने लगीं. उनका यह प्रयास धीरे-धीरे एक बड़े ब्रांड में बदल गया. आज अपूर्वा के बनाए गिफ्ट और सजावटी उत्पाद भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका, लंदन, न्यूयॉर्क समेत 20 से अधिक देशों में भेजे जा रहे हैं. कई बड़ी कंपनियां और ब्रांड भी अब कस्टमाइज्ड गिफ्टिंग के लिए उनसे जुड़ चुके हैं.
जरूरतमंद महिलाओं को दिया नया जीवन
अपूर्वा की सफलता की खास बात यह है कि उन्होंने अपने व्यवसाय के जरिए कई महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाया. जिन महिलाओं की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और जो दूसरों के घरों में झाड़ू-पोंछा जैसे काम करके जीवन गुजार रही थीं, उन्हें अपूर्वा ने अपने साथ जोड़ा. उन्होंने इन महिलाओं को प्रशिक्षण दिया और गिफ्ट व सजावटी सामान बनाने का हुनर सिखाया. आज यही महिलाएं उनके साथ काम कर रही हैं और अपने पैरों पर खड़ी होकर सम्मानजनक जीवन जी रही हैं.
अपूर्वा का कहना है कि अगर महिलाओं को सही अवसर और मार्गदर्शन मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं. उनका लक्ष्य है कि आने वाले समय में और अधिक महिलाओं को रोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर अपूर्वा की यह कहानी बताती है कि छोटे से कदम से भी बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है. मेहनत, आत्मविश्वास और लगन से कोई भी सपना हकीकत बन सकता है.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.