कौशांबी में महिलाओं की नई पहचान, स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बनी आत्मनिर्भर
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कौशांबी जिले में स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं. बैंक सखी और छोटे व्यवसायों के माध्यम से वे अब अपनी आय खुद अर्जित कर रही हैं, परिवार का सहारा बन रही हैं और समाज में अपनी अलग पहचान व सम्मान हासिल कर रही हैं.
कौशाम्बी. कभी घर चलाना मुश्किल था, लेकिन आज वही महिला अपने परिवार की ताकत बन चुकी है. महिलाएं अपने घर से निकलने के लिए मजबूर होती थी क्योंकि उन्हें घर से निकलने के लिए कोई काम या कोई साधन नहीं था, जिससे महिला आत्मनिर्भर बन सके. लेकिन सरकार द्वारा चलाए गए स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाएं अब खुद आत्मनिर्भर बन रही है और अपने परिवार की देखभाल कर अपने पति को भी आगे बढ़ाने का काम कर रही है, जिससे लोगों को काफी सहायता मिल रही है. इस तरह से कौशांबी जिले में महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बैंक सखी बनी और अब अच्छा इनकम कर रही है. उन्होंने बताया कि पहले हमें हमारे पति के नाम से जाना जाता था लेकिन अब हमें खुद अपने नाम से स्वयं जाना जाता है. इससे हमें बहुत ही खुशी महसूस होती है.
महिला आशा देवी ने बताया कि 4 साल पहले सरस्वती स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई है. इसके पहले में हाउसवाइफ जो घरों काम करती थी. इसके पहले मैं खुद अपने पति पर निर्भर थी लेकिन जबसे समूह से जुड़ी और बैंक सखी बनी मैं इस समय स्वयं आत्मनिर्भर बन चुकी हूं. मुझे किसी भी प्रकार की आवश्यकता होती है पैसों की तो मुझे पति से मांगने की जरूरत नहीं होती है. मैं खुद स्वयं अपने काम करके ही खर्च उठाती हूं और जरूरत पड़ती है तो दूसरों को भी दे देती हूं.
अब किसी पर नहीं रहना पड़ता निर्भर
आशा देवी को गांव की भाभी ने सलाह दी की समूह से जुड़े और आत्मनिर्भर बने. उसके बाद वह समूह से जुड़कर बैंक सखी बनी फिर बैंक से स्वरोजगार के लिए 6 दिनों के लिए ट्रेनिंग दिया गया. उस ट्रेनिंग में सभी महिलाओं को बैंक के कार्य के बारे में बताया गया. तब से अब अच्छी कमाई हो जाती है जिससे किसी से मांगने की आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि जब तक कोई कार्य नहीं कर रहे थे किसी ना किसी से उधार लेने पड़ते थे. लेकिन इस समय अब हमें पैसे के साथ-साथ सम्मान कर रहे हैं. जो लोग पहले कहते थे कि महिलाएं क्या करती है केवल घर का ही कार्य करती है तो अब इस समय समूह से जुड़ने के बाद महिला घर के कार्यों के साथ-साथ अपना समूह चला कर पैसे भी कमा रही है इससे उन्हें अच्छा लाभ हो रहा है, अच्छा सम्मान भी मिल रहा है. हमारा यही कहना है कि सभी महिलाएं समूह से जुड़े और आत्मनिर्भर बने क्योंकि समूह से जुड़कर सरकार द्वारा CCL, CIF लोन देकर महिलाओं को कोई भी बिजनेस शुरू करके स्वयं आत्मनिर्भर बन सकती है.
समूह की महिला सुषमा देवी ने बताया कि इस समूह से जुड़ने के बाद काफी लाभ मिल रहा है क्योंकि इसके पहले जब हम लोग घरों में बैठते थे तो काफी परेशान होते थे और घरों की समस्या को लेकर तमाम तरह की उलझने होती थी, जिसे पति से कहने में भी हम लोगों को संकोच होती थी. लेकिन जब से महिला सरस्वती स्वयं सहायता समूह से जुड़े हैं स्वयं आत्मनिर्भर बन चुके हैं. समूह से जुड़ने के बाद हमने लोन लेकर भैंस पालन का कार्य शुरू किया. जिससे हम लोग भैंस को पाल के उसके दूध के बिक्री करते हैं. इसी से अच्छा पैसा भी कमाते हैं, इस तरह से अन्य महिलाएं भी समूह से जुड़े और आत्मनिर्भर बने ताकि किसी से भी किसी प्रकार की ज़रूरतें पड़ने पर हाथ ना फैलाना पड़े.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें