खत्म होगा कार्यवाहक DGP का दौर, राजीव कृष्ण की दावेदारी मजबूत
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की पुलिसिंग और प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है. पिछले चार सालों से कार्यवाहक डीजीपी के भरोसे चल रहे उत्तर प्रदेश को अब जल्द ही अपना ‘स्थायी’ पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मिल सकता है. योगी सरकार ने इसके लिए प्रक्रिया तेज कर दी है और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को अधिकारियों के नामों का एक पैनल भेज दिया है. सूत्रों की मानें तो इस रेस में वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण का नाम सबसे आगे चल रहा है.
चार साल का इंतजार होगा खत्म
उत्तर प्रदेश में आखिरी स्थाई डीजीपी मुकुल गोयल थे, जिन्हें 11 मई 2022 को पद से हटाया गया था. तब से लेकर अब तक यूपी पुलिस की कमान कार्यवाहक अधिकारियों के हाथ में ही रही है. लेकिन, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए गृह विभाग ने औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं. मंगलवार को राज्य सरकार ने 1990 से 1996 बैच तक के उन सभी अफसरों के नाम भेज दिए हैं, जिन्होंने 30 साल की सेवा पूरी कर ली है.
सीनियरिटी लिस्ट और मुख्य दावेदार
नियमों के मुताबिक, यूपीएससी वरिष्ठता (सीनियरिटी) और सर्विस रिकॉर्ड के आधार पर तीन अधिकारियों के नाम राज्य सरकार को वापस भेजेगी। इन्हीं तीन नामों में से मुख्यमंत्री को एक नाम फाइनल करना होगा. वर्तमान वरिष्ठता सूची पर नजर डालें तो:
- रेणुका मिश्रा (1990 बैच): सीनियरिटी लिस्ट में सबसे ऊपर हैं, फिलहाल डीजीपी मुख्यालय से अटैच हैं.
- आलोक शर्मा (1991 बैच): वर्तमान में केंद्र में डीजी एसपीजी (SPG) हैं. हालांकि, उनका रिटायरमेंट जून 2026 में है.
- पीयूष आनंद (1991 बैच): वर्तमान में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर डीजी एनडीआरएफ (NDRF) के पद पर तैनात हैं.
- राजीव कृष्ण (1991 बैच): वर्तमान में यूपी के कार्यवाहक डीजीपी हैं.
- पीसी मीणा (1991 बैच): वर्तमान में डीजी जेल के पद पर तैनात हैं.
चूंकि, आलोक शर्मा और पीयूष आनंद केंद्र में बड़ी जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं, ऐसे में पूरी संभावना है कि अंतिम तीन (टॉप-3) के पैनल में राजीव कृष्ण का नाम शामिल होगा और सरकार उनके अनुभव को देखते हुए उन्हीं के नाम पर मुहर लगा सकती है.
कौन हैं राजीव कृष्ण?
राजीव कृष्ण 1991 बैच के कड़क और सुलझे हुए आईपीएस अफसर माने जाते हैं. चर्चा है कि वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सबसे भरोसेमंद अफसरों में से एक हैं. वर्तमान में कार्यवाहक डीजीपी के रूप में प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर उनकी पकड़ और उनका बेदाग करियर उन्हें इस पद का सबसे प्रबल दावेदार बनाता है. उनके पास यूपी के विभिन्न चुनौतीपूर्ण जिलों में काम करने का लंबा अनुभव है.
काम का काफी लंबा अनुभव है राजीव कृष्ण को
राजीव कृष्ण का करियर उपलब्धियों से भरा रहा है. उन्होंने अपने करियर में फिरोजाबाद, इटावा, मथुरा, फतेहगढ़, बुलंदशहर, गौतम बुद्ध नगर (नोएडा), आगरा, लखनऊ और बरेली जैसे महत्वपूर्ण जिलों के कप्तान रह चुके हैं. इसके अलावा, उन्हें यूपी पुलिस की सबसे घातक यूनिट ‘स्पेशल टास्क फोर्स’ (STF) में भी काम करने का गहरा अनुभव है.
पावरफुल फैमिली बैकग्राउंड
राजीव कृष्ण का परिवार भी प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से काफी प्रभावशाली है. उनकी पत्नी मीनाक्षी सिंह भारतीय राजस्व सेवा (IRS) की अधिकारी हैं और लखनऊ में इनकम टैक्स विभाग में तैनात हैं. उनके साले राजेश्वर सिंह (पूर्व ईडी अधिकारी) वर्तमान में लखनऊ की सरोजनी नगर सीट से भाजपा विधायक हैं. वहीं, उनकी सरहज (साले की पत्नी) लक्ष्मी सिंह वर्तमान में नोएडा की पुलिस कमिश्नर हैं.
चर्चाओं का बाजार गर्म
प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि राजीव कृष्ण का वर्तमान में प्रदेश की कमान संभालना उनके पक्ष में सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है. सरकार चाहती है कि महाकुंभ और आगामी चुनौतियों को देखते हुए एक ऐसा अधिकारी डीजीपी बने जिसे जमीनी हकीकत का पता हो. राजीव कृष्ण इस सांचे में पूरी तरह फिट बैठते हैं. अब बस इंतजार UPSC के पैनल वापस आने का है, जिसके बाद यूपी पुलिस को अपना नया परमानेंट मुखिया मिल जाएगा.