गजब के हैं मी लॉर्ड, 90 दिन में सुन लिए 510 केस, 508 में दे दिए बेल

0
गजब के हैं मी लॉर्ड, 90 दिन में सुन लिए 510 केस, 508 में दे दिए बेल


Last Updated:

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस पंकज भाटिया एक बार फिर सुर्खियों में हैं. क्योंकि जस्टिस पंकज भाटिया के फैसलों को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2025 में अक्टूबर से लेकर दिसंबर के महीने तक में जस्टिस भाटिया ने दहेज हत्या से जुड़े 510 नियमित मामलों में फैसला सुनाया है और इनमें से 508 मामलों में उन्होंने आरोपियों को जमानत दी है.

Zoom

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज पंकज भाटिया.

प्रयागराजः इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस पंकज भाटिया एक बार फिर सुर्खियों में हैं. क्योंकि जस्टिस पंकज भाटिया के फैसलों को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2025 में अक्टूबर से लेकर दिसंबर के महीने तक में जस्टिस भाटिया ने दहेज हत्या से जुड़े 510 नियमित मामलों में फैसला सुनाया है और इनमें से 508 मामलों में उन्होंने आरोपियों को जमानत दी है. इसके अलावा यह भी खुलासा हुआ है कि इन सभा जमानत आदेशों की भाषा, फैसले का स्ट्रक्चर और जमानत राशि भी लगभग एक जैसी ही है. जबकि अलग-अलग मामलों में पीड़ितों की मौत की परिस्थितियां अलग-अलग थीं.

सभी केस में एक ही कमेंट, एक ही जमानत धनराशि
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार इन सभी आदेशों में करीब आधे मामलों में जस्टिस भाटिया ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है कि जिससे यह लगे कि मृत्यु से ठीक पहले दहेज के चलते प्रताड़ना हुई हो. 510 केस में से 340 केस में मौत का कारण फांसी, 27 केस में जहर खाने, 16 में गला घोंटने, 11 में जलने की चोट, 7 में गला दबाकर मारने और 7 सिर में सिर पर चोट लगने का जिक्र है. वहीं 4 मामलों में डूबने से मौत की बात कही गई है. जबकि 10 मामलों को छोड़कर बाकी सभी में कोर्ट ने कहा कि आरोपी का कोई क्रिमिनल हिस्ट्री भी नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने जताई थी नाराजगी
बता दें कि बीते 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर फैसला सुनाते हुए जस्टिस भाटिया के फैसलों पर नाराजगी जताी थी. याचिका में जस्टि भाटिया के फैसले को चुनौती दी गई थी. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए कहा था कि 10 अक्टूबर 2025 का विवादित आदेश अबतक के सबसे चौंकाने वाले और निराशजनक आदेशों में से एक है. कोर्ट ने सवाल उठाया था कि दहेज हत्या जैसे गंभीर अपराध में आरोपी के पक्ष में फैसला सुनाते वक्त हाईकोर्ट ने किन बातों को आधार बनाया.

About the Author

authorimg

Prashant Rai

प्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ें



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *