गर्मियों में ये फसलें किसानों को बनाएंगी मालामाल! कम समय में होगा मोटा मुनाफा

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गर्मियों में ये फसलें किसानों को बनाएंगी मालामाल! कम समय में होगा मोटा मुनाफा


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गर्मियों में ये फसलें किसानों को बनाएंगी मालामाल! कम समय में होगा मोटा मुनाफा

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Best Crops for Summer Season: गर्मियों का पारा चढ़ते ही उत्तर भारत के किसानों के पास कम समय में मोटी कमाई करने का शानदार मौका होता है. मार्च से जून तक का जायद सीजन खीरा, तरबूज और मूंग जैसी फसलों के लिए वरदान माना जाता है. एएमयू की प्रोफेसर सालेहा जमाल के अनुसार, सही तकनीक और सिंचाई के प्रबंधन से किसान न केवल अपनी लागत कम कर सकते हैं, बल्कि भीषण गर्मी में भी बंपर पैदावार ले सकते हैं. जानिए मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों और किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ उठाकर कैसे आप अपनी खेती को मुनाफे का सौदा बना सकते हैं.

अलीगढ़: जैसे-जैसे गर्मियों का मौसम शुरू हो रहा है और तापमान लगातार बढ़ रहा है, किसानों के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है कि इस चिलचिलाती धूप में कौन सी फसलें लगाई जाएं जो कम लागत में अच्छा मुनाफा दे सकें. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर और कृषि विशेषज्ञ सालेहा जमाल के अनुसार, उत्तर भारत में मार्च से जून तक का समय जायद फसलों के लिए सबसे उपयुक्त होता है. रबी की फसल कटने के बाद और खरीफ की बुवाई से पहले का यह छोटा सा अंतराल किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई का एक बड़ा जरिया बन सकता है.

सब्जियों और फलों की खेती से होगी आमदनी
प्रोफेसर सालेहा जमाल बताती हैं कि जायद सीजन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसकी फसलें बहुत कम समय में तैयार हो जाती हैं. सब्जियों में खीरा, भिंडी, टमाटर और करेला जैसी फसलें इस मौसम में बेहतरीन पैदावार देती हैं. ये फसलें मात्र दो से तीन महीने के भीतर कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं और बाजार में इनकी मांग हमेशा बनी रहती है. इसके अलावा, गर्मी को मात देने वाले फल जैसे तरबूज और खरबूज की खेती भी इस दौरान की जा सकती है. गर्मियों में पानी से भरपूर इन फलों की भारी डिमांड रहती है, जिससे किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलता है.

दलहन, तिलहन और मिट्टी की नमी का प्रबंधन
मिट्टी और क्षेत्र के अनुसार किसान दलहन और तिलहन की फसलों का चुनाव भी कर सकते हैं. मूंग और सूरजमुखी जैसी फसलें जायद के मौसम में कम समय में पककर तैयार हो जाती हैं और अच्छी आय सुनिश्चित करती हैं. हालांकि, गर्मियों में सबसे बड़ी चुनौती पानी और नमी की कमी होती है. प्रोफेसर सालेहा जमाल ने सलाह दी है कि किसानों को सिंचाई की पुख्ता व्यवस्था पहले से कर लेनी चाहिए. मिट्टी की नमी बरकरार रखने के लिए ‘मल्चिंग’ तकनीक का इस्तेमाल करना बेहद फायदेमंद रहता है. इसमें गन्ने की खोई (बगास) या प्लास्टिक मल्चिंग से मिट्टी को ढक दिया जाता है, जिससे धूप की वजह से पानी जल्दी भाप बनकर नहीं उड़ता और पौधों को जरूरी मॉइस्चर मिलता रहता है.
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KCC योजना और जोखिम से बचाव
गर्मियों में फसल खराब होने के जोखिम को देखते हुए किसानों को सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक रहना जरूरी है. प्रोफेसर ने विशेष रूप से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना का जिक्र किया है. इस योजना के तहत अब किसानों को 5 लाख रुपये तक का क्रेडिट मिल सकता है. इसकी मदद से किसान आधुनिक संसाधन जुटा सकते हैं, अच्छी खाद-बीज खरीद सकते हैं और बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं. सही जानकारी और वैज्ञानिक तकनीकों का मेल ही भीषण गर्मी में भी किसानों की मेहनत को सफल बना सकता है.

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Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें



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