गाजियाबाद में फर्जीवाड़ा! 28 हजार दिव्यांग सर्टिफिकेट जांच के घेरे में, सरकारी नौकरी पर मंडराया संकट
Ghaziabad News: अगर आपने फर्जी तरीके से दिव्यांग (विकलांगता) प्रमाण पत्र बनवाकर सरकारी सुख-सुविधाओं या नौकरी का लाभ उठाया है, तो अब आपकी खैर नहीं. उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है, जिसके तहत पिछले 20 वर्षों में जारी किए गए करीब 28,000 दिव्यांग प्रमाण पत्रों की गहन जांच की जा रही है. इस खबर के सामने आने के बाद उन लोगों में हड़कंप मच गया है जिन्होंने गलत तरीके से लाभ लिया है. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि दोषी पाए जाने पर न केवल नौकरी जाएगी, बल्कि कानूनी कार्रवाई (FIR) भी सुनिश्चित की जाएगी.
शासन के कड़े निर्देशों के बाद गाजियाबाद स्वास्थ्य विभाग की टीम एक्शन मोड में है. विभाग के नोडल अधिकारी अनवर अंसारी की अध्यक्षता में एक विशेष टीम गठित की गई है. यह टीम 2005 के बाद से अब तक जारी हुए सभी सर्टिफिकेट्स की बारीकी से जांच करेगी. रिपोर्ट्स के अनुसार, सबसे अधिक फर्जीवाड़ा आंख, नाक, कान और हड्डी रोग से संबंधित प्रमाण पत्रों में होने की आशंका है. स्वास्थ्य विभाग के रडार पर विशेष रूप से वे मामले हैं जहां लोगों ने अपनी शारीरिक अक्षमता को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया है ताकि आरक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके.
कैसे पकड़ी गई फर्जीवाड़े की कड़ी?
जांच में यह तथ्य सामने आया है कि कई मामलों में केवल 33% दिव्यांगता होने के बावजूद सांठगांठ करके 50 से 55% दिव्यांगता का प्रमाण पत्र हासिल कर लिया गया. ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही माध्यमों से जारी हुए प्रमाण पत्रों की सत्यता जांची जा रही है. सीएमओ गाजियाबाद, डॉ. अखिलेश मोहन का बयान, ‘वर्ष 2015 के बाद से प्रमाण पत्र ऑनलाइन होने लगे थे, जिससे पारदर्शिता बढ़ी थी, लेकिन पुराने मामलों में शिकायतों के आधार पर अब दोबारा पात्रता की जांच की जा रही है. यदि किसी ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर लाभ लिया है, तो संबंधित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा.’
इन श्रेणियों पर है विभाग की पैनी नजर
स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम निम्नलिखित श्रेणियों में जारी सर्टिफिकेट्स पर विशेष ध्यान दे रही है:
नेत्र रोग: कम दिखाई देने के फर्जी दावे.
श्रवण बाधित: सुनने और बोलने में अक्षमता की गलत जानकारी.
मानसिक रोग: मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के संदिग्ध सर्टिफिकेट.
दुर्घटना: एक्सीडेंट के बाद विकलांगता के दावों की मेडिकल रिपोर्ट से मिलान.
क्या है सर्टिफिकेट बनने की सही प्रक्रिया?
भविष्य में ऐसे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए विभाग ने प्रक्रिया को और सख्त कर दिया है. वर्तमान में:
1. प्रत्येक सोमवार को जिला अस्पताल में डॉक्टरों की एक विशेष टीम बैठती है.
2. इसमें मानसिक रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ और ईएनटी स्पेशलिस्ट शामिल होते हैं.
3. पूरी काउंसलिंग और फिजिकल वेरिफिकेशन के बाद ही बोर्ड सर्टिफिकेट जारी करने की संस्तुति करता है.