गेहूं काटने के बाद खाली पड़े खेतों में लगा दें मेंथा, कृषि एक्सपर्ट से जानें तरीका

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गेहूं काटने के बाद खाली पड़े खेतों में लगा दें मेंथा, कृषि एक्सपर्ट से जानें तरीका


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गेहूं काटने के बाद खाली पड़े खेतों में लगा दें मेंथा, एक्सपर्ट से जानें तरीका

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Farming crop diseases : सरसों, आलू और गेहूं की कटाई के बाद खाली पड़े खेतों में किसान मेंथा उगाकर मालामाल हो सकते हैं. इसकी खेती के लिए कुछ बातों के बारे में पता होना जरूरी है. रायबरेली के कृषि एक्सपर्ट शिव शंकर वर्मा लोकल 18 से बताते हैं कि मेंथा की फसल में लगने वाले रोगों और कीटों से बचाव की जानकारी होना जरूरी है. मेंथा में बालदार सुंडी कीट, दीमक, पत्ती लपेटक कीट, पर्णदाग, जड़ गलन का ज्यादा खतरा रहता है. किसानों को समय-समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, इससे उन्हें नुकसान नहीं होगा और उपज भी बढ़ जाएगी. आइये जानते हैं.

रायबरेली. सरसों, आलू और गेहूं की कटाई के बाद खाली पड़े खेतों में किसान जायद सीजन के तहत उगाई जाने वाली मेंथा की खेती करते हैं, लेकिन कई बार किसानों को मेंथा की फसल में लगने वाले रोग और कीट के बारे में जानकारी न होने की वजह से काफी नुकसान उठाना पड़ता है. अब उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है. इस रिपोर्ट में हम मेंथा की फसल में लगने वाले रोग और उससे बचाव के बारे में बताएंगे. कृषि के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव रखने वाले रायबरेली जिले के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के प्रभारी अधिकारी शिव शंकर वर्मा (बीएससी एग्रीकल्चर, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद) लोकल 18 से बताते हैं कि रबी फसल की कटाई के उपरांत किसान मेंथा की खेती करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. हालांकि इसके लिए किसानों को मेंथा की फसल में लगने वाले रोगों और कीटों से बचाव के जानकारी होना जरूरी है. मेंथा की फसल में प्रमुख रूप से बालदार सुंडी कीट, दीमक, पत्ती लपेटक कीट, पर्णदाग, जड़ गलन का ज्यादा खतरा रहता है. किसानों को समय-समय कीटनाशक का छिड़काव करते रहना चाहिए.

अपनाएं ये तरीका 

शिवशंकर वर्मा बताते हैं कि मेंथा में दीमक लगने से पौधा सूखने लगता है. इसके बचाव के लिए क्लोरपाइरीफॉस 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें. बालदार सुंडी कीट पौधे की पत्तियों को चूसते हैं, जिससे तेल की मात्रा कम हो जाती है. इससे बचाव के लिए डाईक्लोरवास 500 एमएल को 700 से 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें. पत्ती लपेटक कीट लगने पर कोराजेन 120 से 130 एमएल दवा 350 से 400 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें. पर्णदाग का प्रकोप होने पर मैंकोजेब 75% डब्ल्यूपी 2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर 800 से 1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव कर सकते हैं.

जड़ गलने के लिए

शिवशंकर वर्मा के मुताबिक, जड़ गलन रोग से बचने के लिए पौधे की रोपाई से पहले 0.1% कार्बेंडाजिम के घोल में 10 से 15 मिनट डुबोकर पौधा रोपाई करना चाहिए. खरपतवार के नियंत्रण के लिए मेंथा के पौधे रोपण करने के 15 से 20 दिन के बाद पहली गुड़ाई, 45 दिन बाद दूसरी गुड़ाई करना चाहिए. यदि ज्यादा खरपतवार हैं तो पेंडामेथेलिन 3.3 लीटर लेकर 500 से 700 लीटर पानी में घोलकर पौधा रोपण के दो-तीन दिन के अंदर छिड़काव कर देना चाहिए. इससे आपकी फसल में खरपतवार नहीं उगेगा.

कितने दिन बाद कटाई

शिवशंकर वर्मा बताते हैं कि मेंथा की फसल की पहली कटाई 90 दिन बाद करना चाहिए. ध्यान रहे कि कटाई के 7 दिन पहले ही सिंचाई बंद कर दें. एक हेक्टेयर में किसान 90 से 100 लीटर तेल प्राप्त कर सकते हैं.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें



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