गेहूं में निकल आई हैं बालियां, तो हो जाएं सावधान, तुरंत करें ये काम, वरना फसल हो जाएगी बर्बाद
इस समय किसानों की गेहूं की फसल में बालियां निकलना शुरू हो गई हैं. यह अवस्था फसल की बढ़वार और दाना बनने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. किसान पूरे परिश्रम से फसल तैयार करते हैं, लेकिन यदि कटाई के समय दाने कमजोर या सिकुड़े हुए मिलते हैं तो चिंता बढ़ जाती है. इसकी एक बड़ी वजह फसल में लगने वाले रोग और पोषक तत्वों की कमी है.
रतुआ रोग और पीली पत्तियां बढ़ा रही परेशानी
विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं में रतुआ रोग तेजी से फैलने वाला फफूंदजनित रोग है. इसमें पत्तियों पर पीले, भूरे या नारंगी रंग के चूर्ण जैसे धब्बे दिखाई देते हैं. यदि समय रहते नियंत्रण न किया जाए तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है.
वहीं पत्तियों का पीला पड़ना जिंक या नाइट्रोजन की कमी का संकेत हो सकता है. पोषक तत्वों की कमी से दाना भराव प्रभावित होता है और बालियों में दाने पतले रह जाते हैं. ऐसे में किसानों को फसल की नियमित निगरानी करते रहना चाहिए.
सिंचाई को लेकर बरतें विशेष सावधानी
कृषि अधिकारी भगवती प्रसाद मौर्य के अनुसार, गेहूं की फसल में जब गांठें बन रही हों, उसी समय सिंचाई करनी चाहिए. लेकिन यदि बाली पूरी तरह निकल आई हो तो उस समय सिंचाई से बचना चाहिए. बाली निकलने के बाद पानी देने से पौधे गिरने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे उत्पादन पर असर पड़ता है.
उन्होंने बताया कि बाली में गांठ बनते समय खेत में हल्की नमी बनी रहनी चाहिए, ताकि दाना सही तरीके से विकसित हो सके. अधिक नमी भी नुकसानदायक हो सकती है.
दाना मोटा करने के लिए करें संतुलित स्प्रे
विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि दाना पतला होने की समस्या दिखे तो किसान तरल उर्वरकों का संतुलित स्प्रे कर सकते हैं. 5 ग्राम यूरिया प्रति लीटर पानी या 10 ग्राम पोटाश प्रति लीटर पानी के घोल का छिड़काव लाभकारी हो सकता है. इसके अलावा 19:19:19 एनपीके घोल का स्प्रे भी दाना भराव में मदद करता है. इससे दाने मोटे, चमकदार और स्वस्थ बनते हैं तथा उत्पादन में वृद्धि होती है.
फूल आने पर न करें तरल छिड़काव
यदि गेहूं की बाली में फूल आ चुके हों तो किसी भी प्रकार की तरल सामग्री का प्रयोग नहीं करना चाहिए. ऐसा करने से दाना बनना रुक सकता है और फसल को भारी नुकसान हो सकता है.
तेज हवाओं के समय भी सिंचाई से बचना चाहिए, क्योंकि इससे फसल गिरने की आशंका रहती है. संतुलित नमी और सही समय पर देखभाल से ही किसान बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं.