गोरखपुर में विरासत गलियारा के निर्माण से स्थानीय बाजार पर दिख रहा असर
गोरखपुर: गोरखपुर के पुराने शहर में इन दिनों हालात तेजी से बदल रहे हैं. रेती घंटाघर, नखास और आसपास की गलियों में विरासत गलियारा (Heritage Corridor) बनाने का काम जोर पकड़ चुका है. जहां कभी छोटी, छोटी दुकानों से भरी संकरी गलियां रोज़ाना हजारों खरीदारों की भीड़ से गूंजती थीं, वहीं आज वहां मलबा, मशीनें और टूटी हुई इमारतें नजर आ रही हैं. अगर आप इन दिनों पुराने शहर में खरीदारी की योजना बना रहे हैं, तो थोड़ा संभलकर निकलें, वरना आपको खाली हाथ ही लौटना पड़ सकता है.
बंद चल रहा है कुछ हिस्सा
विरासत गलियारे के निर्माण के चलते घंटाघर और नखास क्षेत्र का बड़ा हिस्सा फिलहाल बंद कर दिया गया है. कई पुराने मकानों और दुकानों को तोड़ा जा रहा है, जिसका सीधा असर यहां के कारोबारी और खरीदारों पर पड़ा है. स्थानीय दुकानदार नजीर बताते हैं कि, उनकी कपड़ों की दुकान पिछले कई दिनों से बंद है. लोग आते हैं, पूछते हैं, भइया बाजार कहां लग रहा है. लेकिन सच्चाई यह है कि, पूरी लाइन ही सील है और काम पूरा होने तक दोबारा खुलने की उम्मीद नहीं है, वे कहते हैं.
बाजार बंद होने का असर शहर के उन लोगों पर भी पड़ा है जो त्योहारों, शादी या रोजमर्रा की जरूरतों के लिए यहां खरीदारी करने पहुंचते हैं. कई खरीदार घंटाघर तक आते हैं, लेकिन जब सड़कों पर ‘नो एंट्री’ और कंस्ट्रक्शन वर्क इन प्रोग्रेस के बोर्ड देखते हैं तो उन्हें वापस लौटना पड़ता है.
यहां शिफ्ट हो चुकी हैं दुकाने
हालांकि बाजार पूरी तरह से गायब नहीं हुआ है. दुकानदारों ने अस्थायी तौर पर अपनी दुकानें शिफ्ट कर दी हैं. अगर आप खरीदारी करना चाहते हैं तो आपको दो विकल्प मिलेंगे. पहला, घंटाघर से करीब 200 मीटर दूर ‘मस्जिद वाली गली जहां फिलहाल कपड़े, जूते, दुपट्टे और रोजमर्रा के सामान की दुकानें पहले से मौजूद थी और अभी भी चल रही है चल रही हैं.