चित्रकूट में दीपदान मेले का चौथा दिन, ऐतिहासिक गधा मेला बना आकर्षण का केंद्र
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Chitrakoot News: मेले के आयोजक रमेश पांडे ने बताया कि हर साल दीपावली के दूसरे दिन लगने वाले इस मेले में एक लाख रुपये तक के गधे बिकते हैं. व्यापारियों के बीच पशुधन की गुणवत्ता और ताकत को लेकर मोलभाव चलता रहता है,कई व्यापारी इस मेले से अपने सालभर की कमाई का जरिया बनाते हैं.
चित्रकूट धर्म नगरी चित्रकूट में दीपदान मेले का आज चौथा दिन है. दिवाली के दूसरे दिन मंदाकिनी नदी के किनारे लगने वाला ऐतिहासिक गधा मेला इस बार भी चर्चा में है,औरंगजेब के जमाने से चली आ रही यह परंपरा आज भी जारी है. इस मेले में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश सहित कई प्रांतों से व्यापारी अपने गधों और खच्चरों के साथ पहुंचते हैं.और पशुओं की खरीद-फरोख्त पूरे विधि-विधान से करते है.
हजारों की संख्या में आते है व्यापारी
मेले में इस बार हजारों की संख्या में गधे और खच्चर लाए गए हैं. नगर पंचायत द्वारा मेले की व्यवस्था की गई है. मेले में पहुंचने वाले व्यापारियों ने बताया कि गधा मेला न केवल व्यापार का माध्यम है बल्कि यह सदियों पुरानी संस्कृति का प्रतीक भी है. मुगल बादशाह औरंगजेब ने अपने समय में चित्रकूट के इसी मेले से अपनी सेना के लिए गधों और खच्चरों की खरीद की थी,तभी से यह परंपरा चली आ रही है और इसका ऐतिहासिक महत्व बढ़ गया है.
आयोजक ने दी जानकारी
मेले के आयोजक रमेश पांडे ने बताया कि हर साल दीपावली के दूसरे दिन लगने वाले इस मेले में एक लाख रुपये तक के गधे बिकते हैं. व्यापारियों के बीच पशुधन की गुणवत्ता और ताकत को लेकर मोलभाव चलता रहता है,कई व्यापारी इस मेले से अपने सालभर की कमाई का जरिया बनाते हैं.इस मेले में पूरे यूपी सहित कई अन्य जिले से व्यापारी आते है. यह मेला पांच दिवसीय होता है.लेकिन आज में समय में यह तीन दिनों में खत्म हो जाता है.इस मेले में फिल्मी स्टारो के नाम से इनकी ब्रिकी होती है.जो अपने आप में आकर्षित रहता है.