जानें आम के बौर बचाने की ट्रिक, इन तरीकों से बढ़ा सकते हैं पैदावार, थोड़ी सी चूक घातक
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मार्च का महीना शुरू हो चुका है. आम के पेड़ों पर बौर (मोजर/फूल) दिखाई देने लगे हैं. यही बौर आगे चलकर स्वादिष्ट फलों में बदल जाते हैं. यह समय पेड़ों की देखभाल के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण है. अगर इस दौरान मौसम में बदलाव, कीट या रोगों का हमला हो जाए, तो बौर झड़ सकते हैं. ऐसे में आम बागवानों को सावधान रहने की जरूरत है. लोकल 18 से श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय बलिया के मृदा विज्ञान विभाग के एचओडी प्रो. अशोक कुमार बताते हैं कि मौसम में नमी बढ़ने पर आम के बौर पर कीट और फफूंद का हमला तेजी से बढ़ सकता है.
बौर, जिसे आम बोलचाल में मोजर भी कहा जाता है, इन दिनों पेड़ों पर दिखाई देने लगे हैं. इस दौरान आम के बगीचों की नियमित देखभाल करना बेहद जरूरी है. सबसे पहले बाग की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि पेड़ों के आसपास गंदगी या सूखी पत्तियां जमा होने से रोग और कीटों का खतरा बढ़ जाता है. अतः समय-समय पर पेड़ों के नीचे गिरी पत्तियों और कचरे को हटाते रहे, ताकि बाग साफ और स्वस्थ रहे.

पेड़ों की सूखी और कमजोर टहनियों को भी काटते रहना चाहिए. इससे पेड़ों में हवा का संचार सही होता है. फफूंद या अन्य रोगों के पनपने की संभावना कम हो जाती है. अच्छी हवा और धूप मिलने से पेड़ मजबूत और बौर भी स्वस्थ तरीके से ग्रोथ करते हैं. यह छोटी सी सावधानी आगे चलकर पैदावार बढ़ा सकती है.

श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय बलिया के मृदा विज्ञान और कृषि रसायन विभाग के एचओडी प्रो. अशोक कुमार सिंह के मुताबिक, मौसम में नमी बढ़ने पर आम के बौर पर कीट और फफूंद का हमला तेजी से बढ़ सकता है. ऐसे में किसानों को सतर्क रहना चाहिए और समय-समय पर दवाओं का हल्का छिड़काव करना चाहिए.
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तेज हवा भी आम के बौर के लिए बड़ा खतरा बन सकती है. कई बार तेज झोंकों के कारण बौर समय से पहले ही झड़ जाते हैं. इससे बचने के लिए बाग के आसपास पेड़ों की कतार, जाली या झाड़ियां लगाना एक अच्छा उपाय माना जाता है. ये प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करती हैं और तेज हवाओं के असर को कम कर देती हैं.

आम के पेड़ों को सही समय पर संतुलित पोषण देना भी जरूरी होता है. किसान अगर समय-समय पर गोबर की खाद या जैविक खाद का प्रयोग करें, तो पेड़ ज्यादा मजबूत बनते हैं. मजबूत पेड़ों पर बौर भी अच्छी तरह टिके रहते हैं और आगे चलकर फलों का विकास बेहतर तरीके से होता है. पूरा पेड़ फल से लद जाता है.

इस दौरान सिंचाई पर भी खास ध्यान रखना चाहिए. जरूरत के हिसाब से हल्की सिंचाई पेड़ों के लिए फायदेमंद है, लेकिन ज्यादा पानी देना नुकसानदायक हो सकता है. अत्यधिक नमी के कारण भी बौर झड़ने की समस्या बढ़ जाती है. अतः किसान संतुलित मात्रा में ही पानी दें, ताकि पेड़ों की जड़ों को आवश्यक नमी मिल सके.

बौर के समय अगर किसान इन उपायों को अपनाते हैं, तो पैदावार में अच्छा इजाफा हो सकता है. सही देखभाल से बौर सुरक्षित और पेड़ों पर ज्यादा व बेहतर गुणवत्ता वाले आम लगते हैं. थोड़ी सी सावधानी और सही प्रबंधन से किसान अपनी आम की खेती को ज्यादा लाभदायक बना सकते हैं.