झांसी किले की प्राचीर से फहराता है तिरंगा, जहां हर पत्थर में है आजादी की गूंज, 1857 की क्रांति का साक्षी
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Jhansi Fort: आमतौर पर देशभर के किलों पर 15 अगस्त और 26 जनवरी को बड़े राजनीतिक नेता ध्वजारोहण करते हैं. लेकिन झांसी का किला इससे अपवाद है. पिछले 15 सालों से यहां ध्वजारोहण का कार्य जिलाधिकारी द्वारा किया जा रहा है. किले की प्राचीर पर ध्वजारोहण का कार्य सुबह 8:30 बजे जिलाधिकारी करते है. इसके बाद बुंदेलखंड के अन्य स्थानों पर ध्वजारोहण होता है.
झांसी में ऐतिहासिक रानी लक्ष्मीबाई के किले की प्राचीर से हर साल तिरंगा झंडा फहराकर देश की आजादी और गणतंत्र का जश्न मनाया जाता है. इस किले से रानी लक्ष्मीबाई ने 1857 में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका था. रानी लक्ष्मीबाई का यह किला आज भी देश की आजादी और गणतंत्र के प्रतीक के रूप में गर्व से खड़ा है. हर साल 15 अगस्त और 26 जनवरी को इस ऐतिहासिक किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया जाता है. गणतंत्र दिवस पर किले को फूलों से सजाया जाता है और चारों ओर प्रकाश की भव्य व्यवस्था की जाती है. इस दिन तिरंगे की शान को देखने के लिए हजारों पर्यटक किले पर आते हैं.
आमतौर पर देशभर के किलों पर 15 अगस्त और 26 जनवरी को बड़े राजनीतिक नेता ध्वजारोहण करते हैं. लेकिन झांसी का किला इससे अपवाद है. पिछले 15 सालों से यहां ध्वजारोहण का कार्य जिलाधिकारी द्वारा किया जा रहा है. किले की प्राचीर पर ध्वजारोहण का कार्य सुबह 8:30 बजे जिलाधिकारी करते है. इसके बाद बुंदेलखंड के अन्य स्थानों पर ध्वजारोहण होता है.
इतिहासकारों के अनुसार झांसी के किले में ब्रिटिश हुकूमत के बाद कई सालों तक सेना रही. इस दौरान सैनिक अफसर या स्वतंत्रता संग्राम सेनानी समय-समय पर ध्वजारोहण करते थे. जब से किला पुरातत्व विभाग के संरक्षण में आया है. तब से यह कार्य जिलाधिकारी द्वारा किया जाता है. झांसी में अतिथि देवो भव की परंपरा को निभाते हुए जिलाधिकारी द्वारा ध्वजारोहण करने को इतिहासकार बुंदेलखंड की इस परंपरा से जोड़ते है.
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काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें