ट्रांसजेंडर को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पासपोर्ट को लेकर नहीं मांगा जाएगा मेडिकल टेस्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण फैसला दिया है. अदालत ने कहा है कि एक बार डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट से वैलिड ट्रांसजेंडर आइडेंटिटी सर्टिफिकेट जारी हो जाने के बाद पासपोर्ट अथॉरिटी पासपोर्ट में बदलाव के लिए नए मेडिकल टेस्ट या एक्स्ट्रा डॉक्यूमेंट नहीं मांग सकती. हाईकोर्ट ने पासपोर्ट ऑफिस को ट्रांसजेंडर एप्लिकेंट से एक्स्ट्रा मेडिकल टेस्ट की मांग करने से रोक दिया और कहा कि पासपोर्ट में संशोधन के लिए ट्रांसजेंडरों से मेडिकल टेस्ट कराने की मांग संबंधित प्राधिकारी नहीं कर सकते. डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट द्वारा जारी प्रमाण पत्र ही उनकी पहचान का निर्णायक प्रमाण है.
किस कानून के तहत मिला अधिकार
यह फैसला Transgender Persons (Protection of Rights) Act, 2019 के प्रावधानों की व्याख्या करते हुए दिया गया. अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी ट्रांसजेंडर व्यक्ति ने धारा 5 और 6 के तहत पहचान प्रमाणपत्र प्राप्त किया है और जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी के बाद धारा 7 के अंतर्गत संशोधित प्रमाणपत्र हासिल कर लिया है, तो वह प्रमाणपत्र सभी सरकारी दस्तावेजों में मान्य होगा.
याचिकाकर्ता का मामला
यह आदेश खुश आर गोयल की याचिका पर पारित किया गया. 18 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद उन्होंने जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी कराई और जिला मजिस्ट्रेट से पुरुष के रूप में संशोधित पहचान प्रमाणपत्र प्राप्त किया, लेकिन जब उन्होंने पासपोर्ट में लिंग परिवर्तन के लिए आवेदन किया, तो पासपोर्ट कार्यालय ने नया मेडिकल परीक्षण कराने और जन्म प्रमाणपत्र में बदलाव करने का निर्देश दिया.
अदालत की सख्त टिप्पणी
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने कहा कि पासपोर्ट प्राधिकरण की यह मांग कानून की भावना और प्रावधानों के खिलाफ है. अदालत ने कहा कि कानून में लिंग पहचान की मान्यता के लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित है और जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी प्रमाणपत्र ही पर्याप्त है.
पासपोर्ट भी आधिकारिक दस्तावेज
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि आधिकारिक दस्तावेजों की श्रेणी में पासपोर्ट भी शामिल है, जो राज्य का संप्रभु कार्य है. इसलिए किसी अन्य प्राधिकरण को अतिरिक्त शर्तें लगाने का अधिकार नहीं है. अदालत ने कहा कि यदि प्रशासनिक अधिकारी अतिरिक्त बाधाएं खड़ी करेंगे, तो कानून का उद्देश्य गरिमा, समानता और संरक्षण कमजोर हो जाएगा.
आदेश रद्द, याचिका निस्तारित
अंत में अदालत ने पासपोर्ट प्राधिकरण का आदेश रद्द कर दिया और कहा कि जिला मजिस्ट्रेट का प्रमाणपत्र ही इस मामले में अंतिम प्रमाण है. इसके साथ ही याचिका का निस्तारण कर दिया गया.