दवा भी मसाला भी…मात्र ₹100 का पौधा, 20-25 सालों तक देगा कमाई! ये खेती किसानों के लिए है मुनाफे का सौदा
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Tejpatta Ki Kheti: लखीमपुर खीरी में खेती का रुख तेजी से बदल रहा है. अब किसान गेहूं और धान से हटकर ऐसी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं, जिनमें कम लागत में अच्छा मुनाफा मिल सके. इन्हीं में से एक है तेज पत्ते की खेती जो इसी बदलाव की बड़ी मिसाल बनकर सामने आई है. मसाले और औषधीय गुणों से भरपूर तेज पत्ता किसानों के लिए लंबे समय तक कमाई का मजबूत साधन बनता जा रहा है.
लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसान अब परंपरागत खेती से हटकर नए विकल्प अपना रहे हैं. जिले में तेज पत्ते की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है. यह एक ऐसा मसाला है, जिसकी मांग बाजार में पूरे साल बनी रहती है. इसी वजह से किसान कम जगह और कम मेहनत में अच्छी आमदनी कर पा रहे हैं. अब बड़ी संख्या में किसान औषधीय पौधों, मसालों और फूलों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं.
क्यों फायदेमंद है तेज पत्ते की खेती
तेज पत्ता सिर्फ मसाले के रूप में ही नहीं, बल्कि औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है. इसमें मौजूद पोषक तत्व कई बीमारियों में लाभ पहुंचाते हैं. तेज पत्ता त्वचा और बालों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. इसके एसेंशियल ऑयल का इस्तेमाल क्रीम, इत्र और साबुन जैसे उत्पादों में किया जाता है. यही वजह है कि इसकी मांग घरेलू बाजार के साथ-साथ उद्योगों में भी बनी रहती है.
किसान हिमांशु वर्मा की कहानी
मोहम्मदी तहसील के अलीनगर गांव के रहने वाले प्रगतिशील युवा किसान हिमांशु वर्मा बताते हैं कि तेज पत्ते का पेड़ लगाने के करीब दो साल बाद इसकी बिक्री शुरू हो जाती है. बाजार में तेज पत्ते का भाव करीब तीन हजार से चार हजार रुपये प्रति कुंतल तक मिलता है. खास बात यह है कि एक बार लगाया गया पेड़ 20 से 25 साल तक खराब नहीं होता है. इसी पेड़ से दालचीनी भी तैयार की जाती है, जिससे किसानों की कमाई और बढ़ जाती है.
कम लागत में ज्यादा मुनाफा
हिमांशु वर्मा बताते हैं कि तेज पत्ते का पौधा बाजार में करीब 100 से 150 रुपये प्रति पौधा आसानी से मिल जाता है. इसकी देखभाल भी ज्यादा मुश्किल नहीं होती. एक बार पौधा सही तरह से जम जाए, तो यह लंबे समय तक उत्पादन देता है. यही कारण है कि किसान कम लागत में लगातार मुनाफा कमा सकते हैं.
पौधा लगाते समय इन बातों का रखें ध्यान
तेज पत्ते का पौधा लगाते समय इस बात का खास ध्यान रखना जरूरी है कि जड़ों में कीड़े न लगें. अगर जड़ों में कीड़े लग गए, तो पौधा खराब हो सकता है. इससे बचाव के लिए खाद के साथ पेस्टिसाइड और नीम के तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है. इस पौधे को ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती, बस समय-समय पर निगरानी जरूरी है.
किसानों के लिए बन रही नई कमाई का रास्ता
तेज पत्ते की खेती लखीमपुर खीरी के किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है. कम समय में शुरू होने वाली आमदनी और लंबे समय तक चलने वाला उत्पादन इसे खास बनाता है. आने वाले समय में यह खेती जिले के किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें