दिन में नौकरी, रात को पढ़ाई…खादी ग्रामोद्योग के मैनेजर ने छठे प्रयास में क्रैक किया UPSC

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दिन में नौकरी, रात को पढ़ाई…खादी ग्रामोद्योग के मैनेजर ने छठे प्रयास में क्रैक किया UPSC


Success Story : संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में माना जाता है. इस परीक्षा में सफलता पाने के लिए कड़ी मेहनत, धैर्य और निरंतरता की आवश्यकता होती है. इसी का उदाहरण पेश किया है गौतमबुद्ध नगर में जिला खादी ग्रामोद्योग में मैनेजर पद पर तैनात पारस भाटिया ने, जिन्होंने नौकरी के साथ-साथ तैयारी करते हुए UPSC परीक्षा में 937वीं रैंक हासिल की है. उनकी यह सफलता कई अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है.

छठे प्रयास में मिली सफलता
पारस भाटिया ने बताया कि उनका सफर काफी लंबा रहा और वे कई वर्षों से यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे. आखिरकार छठे प्रयास में उन्हें सफलता मिली. उन्होंने कहा कि तैयारी तो वे पहले से कर रहे थे, लेकिन वर्ष 2024-25 में जब उनका उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPCS) के तहत चयन हुआ और उन्हें नौकरी मिली, तब उनके सामने पढ़ाई और नौकरी दोनों को साथ लेकर चलने की बड़ी चुनौती थी. उन्होंने बताया कि दिन में ऑफिस की जिम्मेदारियां निभाने के बाद रात में पढ़ाई करना आसान नहीं था. ऑफिस के टारगेट पूरे करने होते थे और साथ ही पढ़ाई के लिए समय निकालना पड़ता था. सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि वे अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को अलग रखते हुए दोनों को संतुलित करें. इसके लिए उन्होंने समय का सही प्रबंधन किया और लगातार अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा.

मेंटर को दिया सफलता का श्रेय
पारस भाटिया ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार और मेंटर को दिया. उन्होंने बताया कि उनकी तैयारी में सबसे ज्यादा सहयोग अंकित सिंह का रहा, जो स्मार्ट वर्क लैब IAS से जुड़े हैं और उनके मेंटर भी रहे हैं. अंकित सिंह ने उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन दिया. उन्होंने बताया कि कब कौन-सा टेस्ट देना है और किस तरह अपनी तैयारी को व्यवस्थित करना है, इन सभी बातों में मेंटर का सहयोग बेहद अहम रहा. उन्होंने बताया कि यूपीएससी की तैयारी केवल एक व्यक्ति की नहीं होती, बल्कि इसमें पूरे परिवार का सहयोग शामिल होता है. जब भी वे मानसिक रूप से कमजोर महसूस करते थे, उस समय उनका परिवार हमेशा उनके साथ खड़ा रहा और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा.

कमजोर नजर के बावजूद नहीं मानी हार
पारस भाटिया ने बताया कि बचपन से ही उनकी आंखों की रोशनी थोड़ी कम है, जिसके कारण पढ़ाई के दौरान उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा. ऐसे समय में उनके माता-पिता ने उनका पूरा साथ दिया. वे उन्हें पढ़ने-लिखने में मदद करते थे और हौसला बढ़ाते रहते थे. उनके दोस्त भी उन्हें पढ़कर बताते थे कि किताबों में क्या लिखा है. इसी सहयोग के कारण उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और आगे बढ़ते रहे. उन्होंने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा उनके गृह जनपद सिकंदराबाद, जिला बुलंदशहर से हुई. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के करोड़ीमल कॉलेज से ग्रेजुएशन किया और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की. पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स करने के कारण उन्होंने यूपीएससी में अपना ऑप्शनल विषय भी पॉलिटिकल साइंस एंड इंटरनेशनल रिलेशंस (PSIR) चुना.

पढ़ाई में मोबाइल और इंटरनेट बन सकते हैं मददगार, सही उपयोग करना जरूरी

पारस भाटिया का कहना है कि आज के समय में मोबाइल और इंटरनेट का उपयोग पढ़ाई में बहुत मददगार साबित हो सकता है, लेकिन इसका सही इस्तेमाल करना जरूरी है. उन्होंने कहा कि मोबाइल के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के उपयोग हो सकते हैं. यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर कई ऐसे चैनल हैं जिनसे अभ्यर्थी पढ़ाई से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी और मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं. लेकिन इसके लिए जरूरी है कि छात्र यह समझें कि उन्हें कौन-सी सामग्री देखनी है और किससे बचना है.

स्पष्ट योजना, निरंतरता और सही मार्गदर्शन से मिलती है सफलता

उन्होंने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग भी पढ़ाई में मददगार हो सकता है, लेकिन इसका इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए. छात्रों को अपनी जरूरत के हिसाब से इन तकनीकों का उपयोग करना चाहिए और अपने लक्ष्य को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए.
अभ्यर्थियों को सलाह देते हुए पारस भाटिया ने कहा कि यूपीएससी की तैयारी करने वालों को सबसे पहले अपनी पढ़ाई की स्पष्ट योजना बनानी चाहिए और उसी के अनुसार आगे बढ़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि केवल लंबे समय तक पढ़ाई करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि निरंतरता बनाए रखना सबसे ज्यादा जरूरी है. अगर कोई व्यक्ति दिन में 10 घंटे नौकरी करता है तो भी उसे कम से कम कुछ समय नियमित रूप से पढ़ाई के लिए जरूर निकालना चाहिए और अपने तय किए गए लक्ष्य को लगातार पूरा करना चाहिए. उन्होंने कहा कि सही मार्गदर्शन और मेंटरिंग भी इस परीक्षा की तैयारी में अहम भूमिका निभाती है. यदि अभ्यर्थी सही दिशा में मेहनत करते हैं और धैर्य बनाए रखते हैं, तो सफलता जरूर मिलती है.



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