धार्मिक किताब, पहचान पत्र… मौलाना दादा के ठिकानों से ED को क्या मिला?
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यूके की नागरिकता लेकर यूपी से सैलरी और रिटारयमेंट वाली सुख-सुविधा लेने वाले मौलाना शमशुल हुदा के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी के बाद लगातार नए खुलासे हो रहे हैं. इस बीच उसके मोबाइल फोन से पता चला है कि शमशुल को व्हाट्सएप ग्रुप में ‘मौलाना दादा’ के नाम से जाना जाता था.
मौलाना शमशुल हुदा के ठिकानों पर छापेमारी.
लखनऊः यूके की नागरिकता लेकर यूपी से सैलरी और रिटारयमेंट वाली सुख-सुविधा लेने वाले मौलाना शमशुल हुदा के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी के बाद लगातार नए खुलासे हो रहे हैं. इस बीच उसके मोबाइल फोन से पता चला है कि शमशुल को व्हाट्सएप ग्रुप में ‘मौलाना दादा’ के नाम से जाना जाता था. मौलाना के घर से कई धार्मिक किताबें भी बरामद हुई हैं. जांच में यह भी पता चला है कि वह मदरसों के ज़रिए ग़रीब और अन्य समुदाय के लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए भी उकसाता था. ईडी की छापेमारी के दौरान ब्रिटिश मौलाना शमसुल हुदा के घर से ईडी को कई धार्मिक किताबें मिली हैं. कुछ पहचान पत्र भी मिले हैं.
शमशुल और उसके परिवार के खिलाफ तीन एफआईआर
बता दें कि उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले में प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत रहे शिक्षक शमशुल पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी के आरोप हैं. मामले में तीन एफआईआर दर्ज की गई हैं और जांच के दौरान करोड़ों रुपये के लेन-देन तथा कई संपत्तियों का खुलासा हुआ है. जानकारी के मुताबिक शमशुल हुदा खान साल 1984 में एक मदरसे में प्राथमिक शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए थे. साल 2013 में उन्होंने यूनाइटेड किंगडम (यूके) की नागरिकता हासिल कर ली. इसके बावजूद वे वर्ष 2017 तक वेतन लेते रहे। इतना ही नहीं, सेवानिवृत्ति के बाद भी साल 2023 तक पेंशन भी लेते रहे.
ब्रिटिश नागरिकता लेने के बाद भी 2017 में आया था वोट करने
जांच में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2013 में यूके की नागरिकता लेने के बाद भी उन्होंने कथित रूप से साल 2017 के विधानसभा चुनाव में मतदान किया. इस पूरे मामले में समसुल हुदा खान, उनकी पत्नी, बेटे और बहू के खिलाफ तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं. जांच एजेंसियां वित्तीय अनियमितताओं, सरकारी धन के दुरुपयोग और अन्य संभावित अपराधों की गहराई से जांच कर रही हैं. वित्तीय जांच में खुलासा हुआ है कि लगभग 5.5 करोड़ रुपये चार बैंक खातों में आए. ये खाते समसुल हुदा खान, उनकी पत्नी, बेटे, बहू और उनसे जुड़े एनजीओ ‘रजा फाउंडेशन’ के नाम पर बताए जा रहे हैं. जांच एजेंसियां इन लेन-देन के सोर्स और उपयोग की पड़ताल कर रही हैं.
17 संपत्तियों की कीमत 20 करोड़ रुपये
जांच में पिछले 5 से 7 सालों के दौरान कमाई की गई 17 संपत्तियों की जानकारी भी सामने आई है. इन संपत्तियों की अनुमानित कीमत 20 करोड़ रुपये से अधिक है. संपत्तियों के दस्तावेजों और फंडिंग सोर्स की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनकी खरीद में कथित अवैध धन का इस्तेमाल तो नहीं हुआ. जांच को आगे बढ़ाते हुए ईडी ने संत कबीर नगर जिले में चार अलग-अलग परिसरों पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया. छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और अन्य सबूत जुटाए गए हैं. यह मामला सरकारी सेवा में रहते हुए विदेशी नागरिकता प्राप्त करने, वेतन और पेंशन लेने, कथित अवैध वित्तीय लेन-देन और संपत्ति कमाने जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा है. जांच एजेंसियां अब बैंक खातों, संपत्तियों और मतदान संबंधी रिकॉर्ड की गहन पड़ताल कर रही हैं. बेटा फरार है ED के मुताबिक
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प्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ें