नंद मंदिर में आज भी विराजमान हैं श्रीकृष्ण और बलराम के प्राचीन विग्रह, जानिए रहस्य
मथुरा : कृष्ण की क्रीड़ा स्थली मानी जाने वाली नंद मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के प्राचीन विग्रह आज भी मौजूद हैं. मान्यता के अनुसार, ये विग्रह नंद भवन में उनके सखा के रूप में विराजमान हैं. करीब 70 वर्ष पहले ये विग्रह जमीन से प्रकट हुए थे. इन्हें बाद में श्रीधामा और मधु मंगल की उपाधि देकर एक साइड में स्थापित किया गया.
कृष्ण का रहस्य और अज्ञात इतिहास
कान्हा एक रहस्य हैं, जिसे आज तक कोई नहीं जान पाया, जो व्यक्ति इसे जानने की कोशिश करता है, वह अपनी सुध-बुध खो बैठता है. यही रहस्य दशकों से नंदगांव में प्रचलित है. मथुरा से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित नंदगांव में नंद भवन मंदिर इस रहस्य का केंद्र है.
ज्योतिषाचार्य राम किशोर भारद्वाज से खुला रहस्य
नंदगांव के स्थानीय ज्योतिषाचार्य राम किशोर भारद्वाज शास्त्री ने लोकल 18 को बताया कि वर्तमान में गर्भगृह में विराजमान जो विग्रह हैं, वे असली नहीं हैं. धरती से स्वयं प्रकट हुए प्राचीन विग्रहों को बाद में बड़े विग्रहों के साथ स्थापित किया गया. शास्त्री के अनुसार, करीब 70 वर्ष पहले नंद भवन में चार प्रमुख विग्रह थे नंद बाबा, मां यशोदा, बलदाऊ और स्वयं भगवान कृष्ण. भगवान कृष्ण नंद बाबा के अत्यंत प्रिय थे, इसलिए उनका विग्रह उनके बगल में रखा गया. दाऊजी महाराज मां यशोदा के करीब विराजमान थे.
वर्तमान विग्रह और प्राण प्रतिष्ठा
आज गर्भगृह में जिन बड़े विग्रहों का दर्शन होता है, उनमें कृष्ण और बलराम शामिल हैं. इनका प्राण प्रतिष्ठा करीब 70 वर्ष पहले की गई थी. प्राचीन विग्रह जो आज भी गर्भगृह में हैं, उन्हें श्रीधामा और मधु मंगल के नाम से प्रतिष्ठित किया गया है. वहीं राधा रानी का विग्रह भी मां यशोदा के बराबर में पर्दे के पीछे विराजमान है.
धार्मिक महत्व और मान्यतायें
नंद मंदिर में विराजमान ये प्राचीन विग्रह धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। भक्तों का मानना है कि ये विग्रह न केवल कृष्ण और बलराम की लीला का प्रतीक हैं, बल्कि उनके सखा और परिवार के रूप में भी उनकी उपस्थिति का अहसास कराते हैं। मंदिर का यह इतिहास और रहस्य आज भी लोगों को चमत्कृत करता है और नंदगांव को धार्मिक एवं पर्यटन दृष्टि से विशेष बनाता है।