नमाज के नाम पर घर में भीड़ जुटाना गलत.. बरेली सामूहिक नमाज विवाद पर HC का फैसला

0
नमाज के नाम पर घर में भीड़ जुटाना गलत.. बरेली सामूहिक नमाज विवाद पर HC का फैसला


Last Updated:

Allahabad High Court News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली के सामूहिक नमाज विवाद को लेकर दाखिल याचिका का निस्तारण करते हुए कहा कि निजी संपत्ति पर भीड़ जुटाकर नमाज पढ़ें गलत है. हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि निजी संपत्ति की आड़ में सार्वजनिक व्यवस्था और शांति व्यवस्था को खतरे में नहीं डाला जा सकता.

ख़बरें फटाफट

Zoom

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली सामूहिक नमाज मामले में सुनाया अहम फैसला

प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली के सामूहिक नमाज विवाद मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि निजी संपत्ति पर भीड़ जुटाकर नमाज पढ़ना सही नहीं है. कोर्ट ने इस निजी प्रॉपर्टी पर सामूहिक नमाज को को सही न मानते हुए रोक लगा दी और कहा कि शांति व्यवस्था भंग होने पर प्रशासन कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है.

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत सुरक्षा और निजी संपत्ति की आड़ में सार्वजनिक व्यवस्था और लोक शांति को खतरे में नहीं डाला जा सकता. यह आदेश जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीजन बेंच ने दिया. दरअसल, बरेली निवासी याची तारिक खान ने रमजान के दौरान निजी संपत्ति पर नमाज पढ़ने से रोक लगाने और शांति भंग में किए गए चालान को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी. इस प्रकरण में कोर्ट ने बरेली की डीएम और एसएसपी व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का आदेश दिया था. राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने अदालत को अवगत कराया और कहा कि याचिकाकर्ता सुरक्षा की आड़ में नियमों का दुरुपयोग कर रहा है. हलफनामे और साक्ष्यों के माध्यम से अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता की निजी संपत्ति पर प्रतिदिन 50-60 लोग नमाज के लिए एकत्रित हो रहे हैं, जिससे क्षेत्र की सांप्रदायिक शांति और सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा हो रहा है. कानून और व्यवस्था बनाए रखना अधिकारियों का प्राथमिक कर्तव्य है और ऐसी प्रथाओं को जारी रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती है, जो सार्वजनिक शांति में व्यवधान डालें.

प्रशासन कार्रवाई के लिए स्वतंत्र

बहस के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता राजेश कुमार गौतम ने अदालत को आश्वस्त किया और कहा कि भविष्य में उक्त संपत्ति पर नमाज के लिए बड़ी संख्या में लोगों को एकत्रित नहीं किया जाएगा. हालांकि, हाईकोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि यदि दोबारा नमाज के बहाने भीड़ जुटाई जाती है, जिससे क्षेत्र की शांति प्रभावित होती है, तो जिला प्रशासन और पुलिस कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होंगे. हाईकोर्ट ने राज्य अधिकारियों को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता और अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध 16 जनवरी 2026 को जारी किए गए चालान तत्काल वापस ले. कोर्ट ने इस मामले में पूर्व में जारी किए गए अवमानना नोटिसों को भी रद्द कर दिया है. साथ ही कोर्ट ने पूर्व में हसीन खान को दी गई सुरक्षा प्रशासन को वापस लेने का निर्देश दिया.

About the Author

authorimg

Amit Tiwariवरिष्ठ संवाददाता

अमित तिवारी, News18 Hindi के डिजिटल विंग में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. वर्तमान में अमित उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, ब्यूरोक्रेसी, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और रिसर्च बेस्ड कवरेज कर रहे हैं. अख़बार…और पढ़ें



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *