नहाएंगे तो संगम में ही..ये जिद बनी ‘जल्लाद’! महाकुंभ में भगदड़ से पहले…

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नहाएंगे तो संगम में ही..ये जिद बनी ‘जल्लाद’! महाकुंभ में भगदड़ से पहले…


Agency:Local18

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Maha Kumbh Stampede: महाकुंभ में भगदड़ मची, 60 श्रद्धालु घायल हो गए और 30 की मृत्यु हो गई. ऐसा नहीं था कि 28 जनवरी की देर रात सिर्फ संगम नोज पर ही भगदड़ मची. भीड़ का दबाव ऐसा रहा कि तमाम एंट्री पॉइंट के हालात खराब…और पढ़ें

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हाइलाइट्स

  • महाकुंभ में भगदड़ से 30 की मृत्यु, 60 घायल.
  • नागवासुकी मंदिर एंट्री पॉइंट पर भीड़ का दबाव.
  • संगम पर स्नान की जिद से बढ़ा दबाव.

Maha Kumbh: 28 जनवरी मंगलवार की रात करीब साढ़े 10 बज रहे थे. प्रयागराज महाकुंभ नगर के प्रमुख एंट्री पॉइंट नागवासुकी मंदिर के पास भीड़ का दबाव अत्यधिक बढ़ गया था. पता चला कि सुरक्षाकर्मियों ने संगम की ओर जाने वाले रास्ते पर बैरिकेडिंग कर उसे बंद कर दिया है. भीड़ बार-बार एंट्री पॉइंट को पार करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन पुलिस की फटकार सुन लौट जाती थी.

इस आपाधापी में कई बार छोटी-मोटी भगदड़ की स्थिति भी वहां बन चुकी थी. कुछ महिलाएं और बुजुर्ग भीड़ के दबाव में गिरे पर समय रहते उन्हें उठा लिया गया. बार-बार सवाल पूछने के बाद सुरक्षाकर्मी श्रद्धालुओं को यही जवाब देते थे, इस रास्ते से संगम जाना माना है, दूसरे रास्ते से जाओ. दरअसल, नागवासुकी पॉइंट को देर रात अचानक बंद करने का कारण यही था कि संगम पर भीड़ अत्यधिक बढ़ चुकी थी.

जब यहां ये हाल तो संगम में क्या होगा?
बता दें कि नागवासुकी मंदिर कुंभनगर का बेहद महत्वपूर्ण एंट्री पॉइंट है. यहां से आधे से ज्यादा शहरियों के अलावा, आस-पास के जिले जैसे कुंडा, प्रतापगढ़, जौनपुर, फाफामऊ, ऊंचाहार, रायबरेली यहां तक की लखनऊ से आए श्रद्धालु प्रवेश करते हैं. रात में जब यहां बैरिकेडिंग की गई तो उस वक्त लाखों की संख्या में श्रद्धालु इस सड़क से संगम जाने के लिए बार-बार दबाव बना रहे थे. हालात को देखकर ऐसा लग रहा था, मानों जनसमुद्र की ऊंची लहरें हिलोर मार रही हों. इस स्थिति को देखने के बाद मन में भय सा समाने लगा कि जब यहां ये हालात हैं तो संगम में क्या होगा?

भीड़ मानने को तैयार नहीं
जब श्रद्धालुओं को नागवासुकी मंदिर एंट्री पॉइंट से लौटाया गया तो वो संगम जाने का दूसरा रास्ता खोजते हुए दारागंज मोहल्ले और उसकी गलियों में प्रवेश करने लगे. दारागंज की हर गली, हर रास्ता श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया. सभी बस संगम जाना चाहते थे और स्थानीय लोगों से संगम जाने का पता पूछते थे. इस पर कई स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं को समझाने का प्रयास किया और कहा कि नजदीक के किसी भी गंगा घाट पर स्नान कर लें, पर ज्यादातर की जिद थी कि नहाएंगे तो संगम ही. उनकी यही जिद लगातार संगम पर दबाव बढ़ा रही थी.

उधर देर रात कमिश्नर…
संगम नोज पर भगदड़ होने से पहले, प्रयागराज कमिश्नर विजय विश्वास पंत ने वहां श्रद्धालुओं से अपील की थी और भगदड़ मचने की आशंका जताई थी. क्योंकि, बहुत से श्रद्धालु संगम नोज पर जाकर स्थान घेर कर आराम कर रहे थे या वहीं सो गए थे. ताकि ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर पुण्य लाभ ले सकें. कमिश्नर का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वह अपील करते सुनाई दिए. कमिश्नर कह रहे थे, ”सभी श्रद्धालु सुन लें, यहां लेटे रहने से कोई फायदा नहीं है, जो सोवत है..सो खोवत है, उठिए, उठिए, स्नान करिए और ये आपके सुरक्षित रहने के लिए बहुत जरूरी है. भक्त बहुत आएंगे और भगदड़ मचने की संभावना है. आप पहले आ गए हैं तो आपको सबसे पहले अमृत मिल जाना चाहिए. सभी श्रद्धालुओं से करबद्ध निवेदन है. उठें..उठें..उठें..सोएं न, जब सबसे पहले आ गए हैं…”

संगम नोज पर श्रद्धालु लेटे थे…
भगदड़ से जान बचाकर निकले श्रद्धालुओं की मानें तो जब भगदड़ मची तब लोग भागने लगे. इस दौरान बहुत से लोग वहां जमीन पर सोए हुए थे. ऐसे में उनके पैरों में फंसने के कारण बहुत से लोग गिर पड़े. पीछे से उनके ऊपर लोग चढ़ गए. जो लेटे थे, उनको भी कुचलकर लोग निकले. ऐसी ही आपाधापी में इतना बड़ा हादसा होता चला गया है.

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