नौकरी को मारी लात, शुरू किया अपना यह काम, आज हर महीने तगड़ी कमाई, जानें चंदौली के जैकी की कहानी

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नौकरी को मारी लात, शुरू किया अपना यह काम, आज हर महीने तगड़ी कमाई, जानें चंदौली के जैकी की कहानी


चंदौली: जिले के धानापुर बाजार में खुला है बैक बेंचर मिनी कैफे (Back bencher mini Cafe), जो यहां के स्थानीय लोगों और बाहर से आने वाले लोगों को स्वादिष्ट और अच्छा फास्ट फूड दे रहा है. इस कैफे की खास बात है इसका नाम और इसके अंदर का बनाया गया डिजाइन.  इस मिनी कैफे के मालिक जैकी आस-पास के सभी स्ट्रीट डॉग को हर रोज खाना खिलाते हैं और उनकी देखभाल भी करते  हैं, जो बाकी लोगों से उन्हें अलग बनाता है.

खाना बनाना लगता है अच्छा

बैक बेंचर मिनी कैफे के मालिक जैकी उर्फ जय करण ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि वह खाना बनाने के बिजनेस में करीब एक साल पहले आए हैं. इससे पहले वह एकाउंट ऑफिस सिगल इंडिया, लुधियाना में काम करते थे. उससे पहले दैनिक भास्कर में वह जॉब करते थे. वहां वह प्रोडक्शन डिपार्टमेंट में काम करते थे. उन्होंने बताया वह चंदौली जिले के धानापुर के ही रहने वाले हैं और उनका मन यहां लगता है, क्योंकि यहां उनके सभी दोस्त रहते हैं और उन्हें जॉब भी नहीं करनी थी, उन्हें सिर्फ अपना काम करना था. खाना बनाना उनको अच्छा लगता है, तो उन्होंने अपना मिनी कैफे खोल लिया.

रिजल्ट आने पर हो गए थे फेल

आगे उन्होंने बताया कि वह अपने मिनी कैफे का नाम बैक बेंचर इसलिए रखे, क्योंकि वह स्कूल से ही बैक बेंचर ही थे और जब उनका कैंपस सेलेक्शन हुआ, तो उन्हें पता नहीं था कि उनका भी हो जाएगा और उनका जो रिजल्ट आया उसमें वह फेल हो गए, लेकिन उनकी जॉब लग चुकी थी. उन्होंने बताया कि उन्हें जानवरों से बहुत प्यार है, इसके पीछे की कहानी यह है कि उनके दोस्त के पास एक जानवर था और उस वक्त उन्हें वह पसंद नहीं था, लेकिन वह जब उसके साथ खेलने लगे, तो धीरे-धीरे उन्हें वह पसंद आने लगा. अब उनके मार्केट में जितने भी डॉग हैं, उनकी देखभाल वह करते हैं.

टाइम पास के लिए खोला था कैफे

वहीं उन्होंने कहा कि वह जब से इस मिनी कैफे को खोले है, तब से महीने की अच्छी कमाई हो जाती है. उनके एक साल में जितने भी पैसे लगे थे, वो सभी पैसे वसूल हो  गए हैं. यह शॉप रेंट पर चला रहे हैं. उन्होंने बताया कि यहां रेंट भी बहुत सस्ता है, सिर्फ 2 हजार 5 सौ रूपए देने होते है, इसमें बिजली बिल भी जुड़ा होता है. सब कुछ खर्च के बाद उनके पास हर महीने 30-35 हजार रूपए बच जाते हैं, जो लोग इस लाइन में आना चाहते हैं, उनको उन्होंने कहा कि वह इस लाइन में तभी आए, जब कुछ बनाना आता हो, नहीं तो न आएं, क्योंकि इसमें बहुत मेहनत है. अगर टाइम पास करना है, तो आ सकते हैं. वह भी टाइम पास के लिए ही शुरू किए थे, ताकि घर पर बोर न हो और अब उन्हें मजा आ लगा है.

खाने के बाद देते हैं अच्छा फीडबैक

जय करण ने बताया कि लोग जब भी हमारे मिनी कैफे पर कुछ खाने आते हैं, तो खाने के बाद अच्छा फीडबैक देते हैं और सभी मुझे यह भी बोलते है कि तुम यहां के रहने वाले नहीं हो, तुम यहां के लगते नहीं हो और मैं रोज बताता हूं कि मैं यही का रहने वाला हूं. मेरे मिनी कैफे में खाने की चीजों की रेट मार्केट से थोड़ी महंगी है. मेरे यहां 25 रुपए से शुरुआत होती है. मेरे मेन्यू में पिज्जा, बर्गर, मंचूरियन, चाउमिन, फ्राइड राइस, टिक्की और फ्रेंच फ्राइज आदि है. हर दिन मेरा मिनी कैफे सुबह 10 बजे के बाद ओपन करता हूं और शुरू दोपहर 2 बजे बाद होता है और रात 9 बजे बंद हो जाता है.



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