परिवार ने छोड़ा साथ, हिम्मत ने थामा हाथ; सुल्तानपुर की अंजली बनीं युवा पीढ़ी की प्रेरणा, जानें संघर्ष की कहानी
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Anjali’s inspiring story : समाज तेजी से बदल रहा है. महिलाएं अब हर क्षेत्र में अपनी जगह बना रही हैं. इसी बदलाव की मिसाल बनी हैं सुल्तानपुर की 20 वर्षीय अंजली, जिसने मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद ढाबे पर काम कर आत्मनिर्भर बनने की राह चुनी. परिवार के सहयोग के बिना संघर्षों में पली अंजली की कहानी आज समाज के लिए प्रेरणा बन रही है.
सुल्तानपुर: एक समय था जब महिलाओं की दुनिया घर की रसोई तक सीमित मानी जाती थी.. लेकिन अब महिलाएं पुरानी धारणाओं को तोड़कर हर क्षेत्र में अपनी क्षमता दिखा रही हैं. सुल्तानपुर की अंजली भी उन्हीं में से एक है, जिसने कम उम्र में खुद अपने पैरों पर खड़े होने का फैसला लिया. अंजली बताती हैं कि उन्होंने कक्षा 9वीं तक पढ़ाई की, लेकिन इसके बाद जीवन के संघर्ष बढ़ते गए. तभी उन्होंने निश्चय किया कि अब उन्हें खुद को संभालना है. काम की तलाश शुरू हुई और इसी दौरान उनकी मुलाकात डॉक्टर पल्लवी कौशल से हुई, जो लखनऊ–वाराणसी हाईवे पर स्थित नंदगांव ढाबा संचालित करती हैं.
नंदगांव ढाबा बना अंजली के जीवन का turning point
डॉक्टर पल्लवी कौशल के मार्गदर्शन में अंजली ने ढाबे पर काम शुरू किया. उन्होंने आधुनिक तरीके से खाना बनाना, खाना परोसना और ढाबे की पूरी कार्यप्रणाली सीखनी शुरू की. शुरुआती झिझक और कठिनाइयों के बावजूद अंजली ने अपने काम में निपुणता हासिल की और आज ढाबे की अहम सदस्य बन चुकी हैं.
डॉक्टर पल्लवी और डॉक्टर कौशलेंद्र बने सहारा
अंजली कहती हैं कि उनके जीवन में सबसे बड़ा योगदान डॉक्टर पल्लवी कौशल और डॉक्टर कौशलेंद्र का रहा है. उन्होंने न सिर्फ मार्गदर्शन दिया बल्कि हर कठिन समय में उनका साथ भी दिया. अंजली बताती हैं कि पल्लवी मैम उनके लिए केवल बॉस नहीं बल्कि प्रेरणा स्रोत हैं.. उनके सहारे ही वे आज आत्मनिर्भर बन पाई हैं.
परिवार ने छोड़ा साथ, टीम ने थामा हाथ
अंजली बताती हैं कि परिवार ने उनके कार्य को समर्थन नहीं दिया.. लेकिन ढाबे पर उन्हें नई टीम, नया माहौल और नई ऊर्जा मिली. टीमवर्क के जरिए उन्होंने अपने अंदर आत्मविश्वास बढ़ाया और अपनी क्षमताओं को पहचाना. आज नंदगांव ढाबा आने वाले लोग भी अंजली की मेहनत और व्यवहार की सराहना करते हैं.
संघर्ष से सफलता तक का सफर जारी
अंजली की कहानी सिर्फ एक ढाबे में काम करने वाली लड़की की नहीं.. बल्कि उस संघर्ष की कहानी है जिसने उसे आत्मनिर्भर बनाया. कम उम्र में हिम्मत दिखाते हुए अपने पैरों पर खड़ा होना और समाज में अपनी पहचान बनाना हर किसी के लिए प्रेरणा है.
समाज के लिए प्रेरणा बन रही है अंजली
अंजली की सफलता यह साबित करती है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर हिम्मत और मेहनत हो तो कोई भी लड़की अपने सपने पूरे कर सकती है. आज वह अपने गांव और जिले में प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं.