पशुपालक गर्मियों में हरे चारे और सही देखभाल से बढ़ाएं दूध उत्पादन और किसान की आय!
Last Updated:
लखीमपुर खीरी में किसान अब गर्मियों में पशुपालन पर अधिक ध्यान दे रहे हैं. हरे चारे की कमी और सही देखभाल के अभाव में दूध उत्पादन घट सकता है, लेकिन मक्का, बाजरा, सोरघम और बरसीम जैसी फसलें खिलाकर किसान दूध उत्पादन और आय दोनों बढ़ा सकते हैं.
लखीमपुर खीरी. जिले में किसान अब पशुपालन पर अधिक जोर दे रहे हैं, जिस कारण किसानों को अच्छा खासा मुनाफा हो रहा है. वहीं गर्मियों के मौसम में पशुओं की देखभाल करना भी बेहद जरूरी होता है. थोड़ी सी लापरवाही पशुओं के लिए हानिकारक हो सकती है. गर्मियों के मौसम में कई बार हरा चारा की कमी होने के कारण पशुओं को संतुलित आहार नहीं मिल पाता है. जब संतुलित आहार पशुओं को नहीं मिल पाता है तब दूध उत्पादन में कमी आती है दूध उत्पादन में कमी आने के साथ-साथ पशुपालन करने वाले किसानों की आर्थिक आय पर भी इसका सीधा असर पड़ता है. लोकल 18 से बातचीत करते हुए मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर दिनेश कुमार सचान ने जानकारी देते हुए बताया कि गर्मियों के मौसम में किसान अपने खेतों में मक्का और बाजरा साइलेज की बुवाई कर सकते हैं जिससे गर्मियों और बरसात के मौसम में हरे चारे की कमी नहीं होगी. साथ ही साथ दूध उत्पादन में भी कमी नहीं आएगी.
गर्मियों में इन बातों का रखें ध्यान
तापमान अधिक होने के कारण पशुओं की भूख कम हो जाती है, जिस कारण दूध में कमी आती है ऐसे में मक्का और बाजरे को सही तरीके से पशुओं को खिलाने से दूध उत्पादन की कमी से राहत मिल सकती है. ध्यान रहे गर्मियों के मौसम में पशुओं को तेज धूप वाले स्थान पर न रहने दे. गर्मी के मौसम में मक्का, सूडान घास, सोरघम (ज्वार), लुसीन और बरसीम की बुवाई करना सबसे अधिक लाभकारी साबित हो सकता है. ये हरे चारे की ऐसी उन्नत प्रजातियां हैं, जो तेज गर्मी के बावजूद आसानी से उग जाती हैं और पशुओं को पर्याप्त पोषण देती हैं. 45 से 60 दिन के अंदर हरा चारा तैयार हो जाता है. पानी का तापमान बिल्कुल गर्म नहीं होना चाहिए और जरूरत से ज्यादा ठंड भी नहीं होना चाहिए. सामान्य तापमान का पानी फायदेमंद होता है. गर्मी के मौसम में पशुओं को एक जगह बांधकर नहीं रखना चाहिए. उन्हें समय-समय पर अलग-अलग जगह पर बांधना जरूरी है.
About the Author
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें