पाठा के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले दिव्यांग छात्र ने बिजली बचत का बनाया मॉडल

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पाठा के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले दिव्यांग छात्र ने बिजली बचत का बनाया मॉडल


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मानिकपुर क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय गढ़चपा के कक्षा 6 के छात्र सिजय, जिसने अपनी छोटी सी उम्र में एक ऐसा प्रोजेक्ट तैयार कर दिया है. जिसको देखने के बाद हर कोई इसकी तारीफ कर रहा है. इस बच्चे ने छोटी सी उम्र में स्मार्ट व्हीकल सेंसिंग, फुट फॉल स्ट्रीट लाइट एंड एनर्जी जेनरेशन थ्रू ब्रेकर्स नाम का मॉडल तैयार किया है, जिसे देखकर सरकारी स्कूलों के मान और बढ़ गया है.

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चित्रकूटः कभी डकैतों की दहशत और शिक्षा से दूरी के लिए बदनाम रहा चित्रकूट का पाठा क्षेत्र अब नई पहचान बना रहा है.जहां एक समय लोग अपने बच्चों को स्कूल भेजने से डरते थे, वहीं आज पाठा की धरती से ऐसे होनहार बच्चे निकल रहे हैं जो अपने हुनर और नवाचार से अपने स्कूल के साथ साथ जिले का नाम रोशन कर रहे हैं.

मानिकपुर क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय गढ़चपा के कक्षा 6 के छात्र सिजय, जिसने अपनी छोटी सी उम्र में एक ऐसा प्रोजेक्ट तैयार कर दिया है. जिसको देखने के बाद हर कोई इसकी तारीफ कर रहा है. इस बच्चे ने छोटी सी उम्र में स्मार्ट व्हीकल सेंसिंग, फुट फॉल स्ट्रीट लाइट एंड एनर्जी जेनरेशन थ्रू ब्रेकर्स नाम का मॉडल तैयार किया है, जिसे देखकर सरकारी स्कूलों के मान और बढ़ गया है. यह प्रोजेक्ट ऊर्जा बचत की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. इस मॉडल की खासियत यह है कि अंधेरा होते ही स्ट्रीट लाइट अपने आप जल जाती हैं और दिन होते ही बंद हो जाती हैं. इतना ही नहीं, सड़क पर जैसे ही कोई वाहन या पैदल व्यक्ति गुजरता है, लाइट की रोशनी अपने आप बढ़ जाती है और खाली सड़क पर यह कम हो जाती है, जिससे बिजली की बचत होती है.

स्पीड ब्रेकर के जरिए ऊर्जा उत्पन्न

इससे भी खास बात यह है कि सिजय ने अपने प्रोजेक्ट में स्पीड ब्रेकर के जरिए ऊर्जा उत्पन्न करने का आइडिया भी जोड़ा है. इसमें जैसे ही कोई वाहन ब्रेकर से गुजरता है, उससे उत्पन्न ऊर्जा का उपयोग लाइट जलाने में किया जा सकता है.बता दे कि सिजय पैर से दिव्यांग है और एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखता है. उसके पिता राजमिस्त्री का काम करते हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं है,इसके बाद भी उसने हमने हौसले को कभी कम नहीं होने दिया.

सिजय ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि एक बार वह अपनी बहन के घर गया था, जहां उसने देखा कि दिन में भी लाइट जल रही थीं और बिजली की बर्बादी हो रही थी. बस वहीं से उसके मन में यह विचार आया कि क्यों न ऐसा सिस्टम बनाया जाए, जो जरूरत के अनुसार ही बिजली का उपयोग करे. इसके बाद उसने अपने शिक्षकों की मदद और इंटरनेट से मिली जानकारी के आधार पर महज एक हफ्ते में यह प्रोजेक्ट तैयार कर लिया है.इस मॉडल को बनाने में आईआर सेंसर, एलईडी लाइट, एड्रिनो यूनो, बैटरी और छोटे-छोटे उपकरणों का उपयोग किया गया है, जो उसे स्कूल से ही उपलब्ध कराए गए थे.

आईआईटी गांधीनगर जाने के मिला मौका

सिजय के यह प्रोजेक्ट तैयार होने के बाद उसे ब्लॉक स्तर पर आयोजित कार्यक्रम में विजेता घोषित किया गया था. इसके बाद जिला स्तर पर भी उसने दूसरा स्थान हासिल किया था.उसकी प्रतिभा को देखते हुए उसे प्लेन के जरिए आईआईटी गांधीनगर में एक्सपोजर विजिट का मौका मिला, जहां उसने चार दिनों तक रहकर नई तकनीकों की जानकारी हासिल की है. उसने बताया कि मेरा सपना है कि आगे चलकर मैं वैज्ञानिक बनू. वही स्कूल के अध्यापक बिहारी लाल ने लोकल 18 को बताया कि यह बच्चा हमारे यहां कक्षा 6 में पढ़ाई करता है.और यह पैर से थोड़ा दिव्यांग भी है. बहुत ही होनहार छात्र है.एक दिन यह अपनी बहन के यहां कर्वी गया था और वहां से आने के बाद इसने मुझे विचार रखा की कर वहां दिन भर लाइट जलती है और बिजली का बिल भी बहुत ज्यादा आता है.

इस पर इसने हमसे पूरी बात बताई जिस पर हमने कुछ इसको थीम्स बताइए और इसने भी कुछ अपने दिमाग का इस्तेमाल कर इस प्रोजेक्ट को बना दिया है. और राष्ट्रीय आविष्कार के तहत एक कार्यक्रम में इस मॉडल का प्रजेंटेशन ब्लॉक स्तर पर हुआ.जहां इसको विजेता घोषित किया गया.जिसके बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी के द्वारा जिले स्तर पर कराया गया. जहां इसने दूसरा स्थान प्राप्त किया. इसके बाद इसको एक्सपोजर विजिट करने के लिए आईआईटी गांधीनगर जाने का मौका मिला था. और चार दिनों तक रहकर वहां काफी चीज सीखी. इसके प्रेरणा स्रोत के लिए हमारे हेड मास्टर हरिशंकर त्रिपाठी भी हैं. और इस मॉडल में सहयोग करने के लिए मनोज शुक्ला ARP का भी काफी योगदान रहा है.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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