पीलीभीत की बेटी तनिष्का राणा का सीबीएसई इंडिया टीम में सिलेक्शन, जाने कैसे बदली किस्मत
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तनिष्का ने अपने सफर के बारे में बताया कि बचपन में उन्हें क्रिकेट से ज्यादा बैडमिंटन पसंद था और वे उसी में अपना करियर देख रही थीं. लेकिन कहते हैं न कि किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. तनिष्का के पिता आकाश, जो उत्तर प्रदेश पुलिस में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, वे खुद क्रिकेट के बहुत बड़े शौकीन हैं. पिता के दिल में क्रिकेट के प्रति जो जुनून था, वही जुनून उन्होंने अपनी बेटी में जगाया. उन्होंने तनिष्का को क्रिकेट खेलने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया. पिता की प्रेरणा से जब तनिष्का ने मैदान पर उतरकर गेंद और बल्ला थामा, तो धीरे-धीरे उनकी रुचि इस खेल में बढ़ती गई. आज नतीजा सबके सामने है.
पीलीभीत: बेनहर गुरुकुल स्कूल की होनहार छात्रा तनिष्का राणा ने अपनी मेहनत और जुनून से क्रिकेट के मैदान पर वो मुकाम हासिल किया है, जो आज पूरे शहर के लिए गर्व का विषय बन गया है. तनिष्का का सिलेक्शन सीबीएसई की अंडर-17 इंडिया टीम में हुआ है. यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि तनिष्का ने जोनल मुकाबलों से लेकर नेशनल कैंप तक अपनी गेंदबाजी से सबको हैरान कर दिया. सेमीफाइनल और फाइनल जैसे दबाव वाले मैचों में मैन ऑफ द मैच बनकर उन्होंने साबित कर दिया कि उनमें बड़े स्तर पर खेलने का दमखम है.
गेंदबाजी का मनवाया लोहा
गौरतलब है कि पीलीभीत जैसे छोटे शहर से निकलकर नेशनल लेवल पर अपनी पहचान बनाना आसान नहीं होता, लेकिन तनिष्का राणा ने इसे मुमकिन कर दिखाया है. बेनहर गुरुकुल स्कूल की इस छात्रा ने स्कूल क्रिकेट के जोनल मुकाबलों में शुरुआत से ही अपनी गेंदबाजी का लोहा मनवाया. उनकी लगातार धारदार गेंदबाजी की बदौलत उन्हें सीबीएसई के नेशनल कैंप के लिए चुना गया. नेशनल कैंप में देश भर की प्रतिभाओं के बीच तनिष्का ने हार नहीं मानी और अपनी बेहतरीन लाइन-लेंथ से चयनकर्ताओं को प्रभावित किया. यही वजह रही कि उन्हें न केवल सीबीएसई की इंडिया टीम में शामिल किया गया, बल्कि टूर्नामेंट के सबसे निर्णायक मुकाबलों यानी सेमीफाइनल और फाइनल में उन्होंने अपनी टीम को जीत दिलाई और मैन ऑफ द मैच का खिताब अपने नाम किया.
बैडमिंटन से शुरू हुई थी कहानी, पिता ने दिखाया क्रिकेट का रास्ता
लोकल 18 से खास बातचीत करते हुए तनिष्का ने अपने सफर के बारे में बताया कि बचपन में उन्हें क्रिकेट से ज्यादा बैडमिंटन पसंद था और वे उसी में अपना करियर देख रही थीं. लेकिन कहते हैं न कि किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. तनिष्का के पिता आकाश, जो उत्तर प्रदेश पुलिस में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, वे खुद क्रिकेट के बहुत बड़े शौकीन हैं. पिता के दिल में क्रिकेट के प्रति जो जुनून था, वही जुनून उन्होंने अपनी बेटी में जगाया. उन्होंने तनिष्का को क्रिकेट खेलने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया. पिता की प्रेरणा से जब तनिष्का ने मैदान पर उतरकर गेंद और बल्ला थामा, तो धीरे-धीरे उनकी रुचि इस खेल में बढ़ती गई. आज नतीजा सबके सामने है.
अब लक्ष्य है टीम इंडिया की जर्सी
तनिष्का की इस कामयाबी से उनके घर और स्कूल में जश्न का माहौल है. उनके शिक्षकों और परिवार का मानना है कि तनिष्का की गेंदबाजी में वो धार है जो उन्हें बहुत जल्द अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाएगी. खुद तनिष्का का लक्ष्य अब बिल्कुल साफ है, वे कहती हैं कि सीबीएसई इंडिया टीम तो बस एक शुरुआत है, उनका असली सपना भारतीय महिला क्रिकेट टीम का हिस्सा बनकर देश के लिए वर्ल्ड कप जीतना है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें