पीलीभीत में जंगली हाथियों का आतंक बढ़ा, किसानों की फसलें खतरे में, जानिए टिप्स

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पीलीभीत में जंगली हाथियों का आतंक बढ़ा, किसानों की फसलें खतरे में, जानिए टिप्स


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पीलीभीत. जंगलों से सटे गांवों में जंगली हाथियों का आतंक बढ़ रहा है. खेतों की फसलें बर्बाद हो रही हैं और आम लोगों की सुरक्षा खतरे में है. इस समस्या का समाधान जिला मानव-वन्यजीव संघर्ष समिति के डॉ. अमिताभ अग्निहोत्री ने सुझाया है, जिसे बी-फेंसिंग कहते हैं. मधुमक्खियों के बक्से खेतों की सुरक्षा करते हैं और ग्रामीणों की आय बढ़ाते हैं.

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पीलीभीत. इन दिनों पीलीभीत में जंगली हाथियों की आवाजाही ने ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ा दी है. जंगल से सटे गांवों में हाथियों की दहशत ने खेतों में खड़ी फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है और आम जनजीवन के लिए खतरा बढ़ा दिया है.

हाथियों के कारण किसानों की परेशानियां
ग्रामीणों के अनुसार हाथी खेतों में घुसकर फसल बर्बाद कर रहे हैं. यह समस्या केवल फसल नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि हाथियों का आना आम जनजीवन के लिए भी खतरा बन गया है.

वैज्ञानिक समाधान: बी-फेंसिंग (Bee-Fencing)
जिला मानव-वन्यजीव संघर्ष समिति के सदस्य डॉ. अमिताभ अग्निहोत्री ने लोकल 18 से बातचीत में एक महत्वपूर्ण और वैज्ञानिक समाधान सुझाया है, जिसे बी-फेंसिंग कहा जाता है. डॉ. अग्निहोत्री बताते हैं कि बी-फेंसिंग का सीधा सा मतलब है खेतों के चारों ओर मधुमक्खियों के बक्से लगाना. यह तकनीक दो स्तरों पर काम करती है:
1) मधुमक्खियों की भिनभिनाहट (Humming Sound) – हाथियों को यह आवाज बेचैन कर देती है और वे खेतों से दूर चले जाते हैं.
2) मधुमक्खियों का हमला – यदि हाथी बक्सों को डिस्टर्ब करता है, तो मधुमक्खियां हमला कर देती हैं, जिससे हाथी खेतों में प्रवेश करने से कतराते हैं.

किसानों के लिए दोहरा फायदा
डॉ. अग्निहोत्री के अनुसार यह पहल किसानों के लिए दो तरह से फायदेमंद हो सकती है:
1) खेतों को हाथियों से होने वाले नुकसान से बचाना और सुरक्षा प्रदान करना.
2) मधुमक्खी पालन के जरिए ग्रामीणों की आय बढ़ाना.

WWF का समर्थन और सफल प्रयोग
विश्व प्रकृति निधि (WWF) ने भी कुछ स्थानों पर इस तकनीक का सफल प्रयोग किया है. जहां पहले हाथियों की संख्या अधिक थी, वहां मधुमक्खी पालन शुरू होने के बाद हाथियों का आना कम हो गया. डॉ. अग्निहोत्री का मानना है कि पीलीभीत के उन गांवों में जहां हाथी अक्सर उत्पात मचाते हैं, यदि शहद पालन की इस परंपरा को अपनाया जाए, तो मानव-वन्यजीव संघर्ष को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. यह समाधान प्रकृति के संतुलन को बनाए रखते हुए ग्रामीणों को आर्थिक सुरक्षा और आय का नया स्रोत भी देता है.

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Madhuri Chaudhary

पिछले 4 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हूं और फिलहाल News18 में कार्यरत हूं. इससे पहले एक MNC में भी काम कर चुकी हूं. यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की बीट कवर करती हूं. खबरों के साथ-साथ मुझे…और पढ़ें



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