फरीदाबाद से दिल्ली तक…अमोनियम नाइट्रेट बरामदगी से जुड़ी कड़ी पर एजेंसियों की नजर, फॉरेंसिक विशेषज्ञों जताई बड़ी साजिश की आशंका

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फरीदाबाद से दिल्ली तक…अमोनियम नाइट्रेट बरामदगी से जुड़ी कड़ी पर एजेंसियों की नजर, फॉरेंसिक विशेषज्ञों  जताई बड़ी साजिश की आशंका


ग्रेटर नोएडा: फरीदाबाद में मिली संदिग्ध सामग्री की फॉरेंसिक जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. जांच के बाद पुष्टि हुई है कि बरामद पदार्थ अमोनियम नाइट्रेट है, एक बेहद खतरनाक और शक्तिशाली विस्फोटक रसायन. सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस बरामदगी से संकेत मिलता है कि मामला किसी संगठित आतंकी साजिश से जुड़ा हो सकता है और इसका संबंध हाल ही में दिल्ली के लाल किला क्षेत्र में हुए ब्लास्ट से भी रहने की संभावना है.

गलगोटिया यूनिवर्सिटी, फॉरेंसिक साइंस विभाग के एसोसिएट डीन डॉ. प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि अमोनियम नाइट्रेट एक हाई-एक्सप्लोसिव प्रकार का पदार्थ है, जिसका डेटोनेशन पावर बहुत अधिक होता है. उन्होंने कहा, ‘हमारे एक्सप्लोसिव दो प्रकार के होते हैं…लो और हाई. अमोनियम नाइट्रेट जैसे हाई-एक्सप्लोसिव बहुत विनाशकारी होते हैं और थोड़ी मात्रा में भी बड़ा नुकसान कर सकते हैं.

डॉ. अग्रवाल ने आगे बताया कि अमोनियम नाइट्रेट आम तौर पर अमोनिया और नाइट्रिक एसिड की रासायनिक अभिक्रिया से तैयार होता है और यह उर्वरक के रूप में भी उपयोग होता है, इसलिए यह अपेक्षाकृत आसानी से उपलब्ध हो सकता है. यह एक शक्तिशाली ऑक्सिडाइज़िंग एजेंट है और कई प्रकार के खतरनाक विस्फोटक तैयार करने में काम आता है.

फरीदाबाद से मिले 350 ग्राम अमोनियम नाइट्रेट को लेकर फॉरेंसिक विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी मात्रा में पदार्थ मिलना किसी संगठित योजना या नेटवर्क की ओर इशारा कर सकता है. आशंका जताई जा रही है कि इसका उपयोग दिल्ली और एनसीआर के विभिन्न स्थानों पर धमाके करने की साजिश में किया जाना था.

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि जांच एजेंसियों को यह देखना होगा कि क्या फरीदाबाद की बरामदगी और लाल किला ब्लास्ट के बीच कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध है.उन्होंने कहा, ‘संभावना है कि दोनों मामलों में प्रयुक्त विस्फोटक समान प्रकृति के हों.’ कहा कि यह भी हो सकता है कि अमोनियम नाइट्रेट से बने विस्फोटक की एक बड़ी खेप तैयार की जा रही थी, जिसे समय रहते पकड़ा गया.

इसके साथ ही जांच में रिसिन (Ricin) नामक एक खतरनाक जैविक विषाक्त पदार्थ का भी संदर्भ मिला है. रिसिन एक अत्यंत विषैला जैविक टॉक्सिन है- इसकी मामूली मात्रा भी जानलेवा हो सकती है और इसे पानी या भोजन में मिलाकर फैलाया जा सकता है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अब मामला केवल रासायनिक खतरे तक सीमित नहीं रहा, बायोलॉजिकल थ्रेट की भी संभावना पर गम्भीरता से विचार किया जा रहा है.

जांच एजेंसियां इन खतरनाक पदार्थों के स्रोत और उनके संभावित उपयोग के मकसद की तहकीकात में लगी हैं. फरीदाबाद से दिल्ली तक फैले संभावित नेटवर्क की कड़ी अब सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है और क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ा दी गई है.



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