बनारस की गलियों में मुस्ताक का अनोखा क्लासरूम, जहां भारतीयों के साथ बांसुरी सीखते हैं विदेशी; एकदम मुफ्त सेवा

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बनारस की गलियों में मुस्ताक का अनोखा क्लासरूम, जहां भारतीयों के साथ बांसुरी सीखते हैं विदेशी; एकदम मुफ्त सेवा


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बनारस की गलियों में मुस्ताक का अनोखा क्लासरूम, जहां बांसुरी सीखते हैं विदेशी

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बनारस की गलियों में मुस्ताक का अनोखा क्लासरूम, जहां बांसुरी सीखते हैं विदेशी

 

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वाराणसी अपनी गलियों, घाटों और आध्यात्मिक माहौल के साथ अनोखे कलाकारों के लिए भी जानी जाती है. इन्हीं गलियों में मुस्ताक अहमद की एक खास पाठशाला लगती है. जहां वह बांसुरी बजाना सिखाते है. अस्सी घाट जाने वाली गली में हर दोपहर उनका यह अनौपचारिक क्लासरूम सजता है. जिसमें देशी ही नहीं बल्कि विदेशी पर्यटक भी शामिल होते है. मुस्ताक बिना किसी धर्म या भेदभाव के सभी को निःशुल्क बांसुरी बजाना सिखाते है. जापान, फ्रांस, कनाडा, कोरिया और अमेरिका से आए कई विदेशी उनके शिष्य रह चुके है. मुस्ताक खुद बांसुरी बनाते और बेचते भी है. जिनकी कीमत 250 से 600 रुपये तक होती है. उनकी सुरीली तान राह चलते लोगों को रोक लेती है.



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