बस एक गलती और उजड़ गया खुशहाल बाजार! मेरठ का यह मार्केट अब पड़ा सुनसान
मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित शास्त्री नगर का सेंट्रल मार्केट देशभर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है. यहां सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश अनुसार, आवास विकास परिषद की ओर से आवासीय क्षेत्र में चल रही व्यवसायिक गतिविधियों पर सील की कड़ी कार्रवाई करते हुए सैट बैक के दिशा निर्देश दिए गए हैं, जिसके बाद से यहां लोग धरने पर भी बैठे हुए हैं. वहीं आवास विकास परिषद की कार्रवाई लगातार जारी है. ऐसे में लोकल 18 की टीम की ओर से भी ग्राउंड पर जाकर लोगों से खास बातचीत की गई.
1989 में शुरू हुआ दुकानों का दौर
लोकल 18 की टीम से खास बातचीत करते हुए सेंट्रल मार्केट के ही रहने वाले 70 वर्षीय बुजुर्ग आंनद कुमार बताते हैं कि 1987 के दंगों के दौरान शहर में कर्फ्यू के हालात थे. ऐसे में लोगों को मार्केट जाना काफी दिक्कत भरा होता था. तभी यही पर ही चार-पांच दुकानों में व्यापार शुरू हुआ, जिसके बाद धीरे-धीरे यह विस्तार लेने लगा.
मेरठ के इस मार्केट की विशेष पहचान
उन्होंने बताया कि 1989 से लेकर वर्ष 2000 तक लगभग 80 से 1000 दुकान यहां खुल गई थी, क्योंकि उस दौर में इतना आवासीय और व्यवसाय को लेकर लोगों को नियमों की जानकारी नहीं हुआ करती थी. ऐसे में यह बाजार विकसित होते हुए चला गया. वर्ष 2000 से 2012 के बीच यह है मार्केट अपनी एक विशेष पहचान मेरठ में बन चुका था, लेकिन साल 2012 में व्यापारी और आवास विकास परिषद की टीम के बीच एक परिसर के निर्माण को लेकर नोंक-झोक हो गई थी, जो मारपीट में तब्दील हुई थी.
उसके बाद आवास विकास परिषद की टीम इसको लेकर कोर्ट के समक्ष चली गई थी, जिसके बाद से दलील का दौर जारी रहा. इसी बीच मेरठ से एक जनहित याचिका भी मार्केट के खिलाफ दाखिल हो गई, जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस आवासीय क्षेत्र में बने अवैध निर्माण पर कार्रवाई के निर्देश दे दिए गए. उसी के तहत अभी मेरठ की पहचान मार्केट अब सुनसान इलाकों में तब्दील है.
कभी सोचा नहीं था आंखों के सामने टूटेगी मार्केट
72 वर्षीय रमेश बताते हैं कि उनकी भी यहीं पर दुकान है, जिसके माध्यम से उन्होंने अपने बच्चों का पालन-पोषण किया है. उन्होंने बताया कि कभी अपनी आंखों के सामने ही यह मार्केट भी टूटने की कगार पर पहुंच सकती है, यह सपने में भी नहीं सोचा था. साल 2012 में हुए झगड़े को भी व्यापारियों ने सुलझाने का भरपूर प्रयास किया था.
उन्होंने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन 38 वर्ग मीटर में भी अगर सेटबैक छोड़ देंगे, तो अपने बच्चों के साथ कहां रहेंगे. अब व्यापार ही नहीं, बल्कि रहने का भी संकट उत्पन्न हो गया है. लेकिन उन्हें पूरी उम्मीद है कि न्याय उनको भी मिलेगा. उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों के सामने यह इतना बड़ा बाजार बन गया, उन पर भी कार्रवाई हो.
त्योहारों पर नहीं रहती पैर रखने की भी जगह
क्षेत्रवासियों का तो यह भी कहना है कि उनकी ओर से जीएसटी टैक्स, व्यावसायिक बिजली कनेक्शन और अन्य हर प्रकार के जो कानूनी दस्तावेजों के माध्यम से व्यापार करना चाहिए, उसी माध्यम से किया जा रहा था. ऐसे में अगर व्यावसायिक रूप से भी टैक्स भरवाकर इसका भी समाधान कानूनी तौर पर हो जाए, तो उनके व्यापार बच सकते हैं.
बताते चलें कि मेरठ के इस मार्केट की बात की जाए, तो दीपावली पर यहां विशेष मेले का आयोजन हर साल किया जाता था, जिसमें हजारों की संख्या में लोग यहां खरीदारी करने के लिए मेरठ ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्र से भी पहुंचते थे. बाजार में हर तरह की चीज लोगों को आसानी से उपलब्ध हो जाती थी, इसलिए इसे भव्य रूप से बाजार को सजाया भी जाता था.