बस्ती के मखौड़ा धाम से 2 अप्रैल से शुरू होगी अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा
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2 अप्रैल से शुरू होने वाली 84 कोसी परिक्रमा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं. इस धार्मिक यात्रा की शुरुआत बस्ती जिले के प्रसिद्ध मखोड़ा धाम से होगी, जहां मान्यता है कि महाराज दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ किया था. 3 अप्रैल को मखोड़ा धाम से विधिवत यात्रा शुरू होगी, जो बस्ती, अयोध्या, अंबेडकर नगर, बाराबंकी और गोंडा समेत पांच जिलों से होकर गुजरेगी. करीब तीन सप्ताह तक चलने वाली यह परिक्रमा 24 अप्रैल को अयोध्या पहुंचेगी.
अयोध्या: अयोध्या में हनुमान जयंती के अवसर पर एक बार फिर आस्था का बड़ा आयोजन होने जा रहा है. 2 अप्रैल से शुरू होने वाली 84 कोसी परिक्रमा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं. इस धार्मिक यात्रा की शुरुआत बस्ती जिले के प्रसिद्ध मखोड़ा धाम से होगी, जहां मान्यता है कि महाराज दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ किया था. 3 अप्रैल को मखोड़ा धाम से विधिवत यात्रा शुरू होगी, जो बस्ती, अयोध्या, अंबेडकर नगर, बाराबंकी और गोंडा समेत पांच जिलों से होकर गुजरेगी. करीब तीन सप्ताह तक चलने वाली यह परिक्रमा 24 अप्रैल को अयोध्या पहुंचेगी.
अयोध्या पहुंचने के बाद श्रद्धालु सीता कुंड पर धार्मिक अनुष्ठान करेंगे, जिसके बाद रामकोट की परिक्रमा संपन्न की जाएगी. हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है, इस 84 कोसी परिक्रमा का आयोजन विश्व हिंदू परिषद का हनुमान मंडल करता है जिसमें भारी संख्या में साधु संत शामिल होते हैं.
यहां श्रद्धालु करा सकते हैं रजिस्ट्रेशन
84 कोसी परिक्रमा के संयोजक सुरेंद्र सिंह ने बताया कि यह परिक्रमा 2 अप्रैल से अयोध्या सरयू पूजन के साथ शुरू होगी, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे श्रद्धालुओं को शामिल होने के लिए कार्य सेवक पुरम में एक ऑफिस बनाया गया है. जहां 84 कोसी परिक्रमा करने वाले श्रद्धालु अपना रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. रजिस्ट्रेशन के लिए उन्हें हेल्थ सर्टिफिकेट के साथ एक आधार कार्ड लाना अनिवार्य होगा. निशुल्क पूरी सेवा रहती है किसी प्रकार किसी भी श्रद्धालुओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाता. इसके बाद श्रद्धालु 84 कोसी की परिक्रमा कर सकेंगे.
इतना ही नहीं अयोध्या की शास्त्रीय सीमा की परिक्रमा को 84 को उसकी परिक्रमा कहा जाता है. 84 कोसी की परिक्रमा करने से जीवन में चल रहे तमाम तरह के पापों से मुक्ति मिलती है साथ ही पुण्य प्राप्त होता है. 84 कोसी परिक्रमा करने वाले श्रद्धालु जब वापस अयोध्या पहुंचते हैं तो वह रामकोट की परिक्रमा करते हैं. सरयू में स्नान करते हैं और अपने परिक्रमा को पूर्ण करते हैं.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें