ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर नाराज हो गए BJP के नए कप्तान, पंकज चौधरी ने लगा दी क्लास
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बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने बीजेपी विधायकों की भोज बैठक पर नाराजगी जताई है. प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भाजपा जनप्रतिनिधियों को स्पष्ट रूप से आगाह किया है कि वे किसी तरह की नकारात्मक राजनीति का शिकार न बनें.
लखनऊः उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों जाति विशेष विधायकों की लामबंदी की खबरें लगातार सामने आ रही है. कुछ महीनों पहले उत्तर प्रदेश के राजपूत विधायकों ने एक बैठक की थी तो अब ब्राह्मण विधायकों ने बैठक कर राजनीतिक बवाल मचा दिया है. हालांकि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने बीजेपी विधायकों की भोज बैठक पर नाराजगी जताई है. ब्राह्मण विधायकों की बैठक में कुछ बीजेपी विधायक भी थे.
पंकज चौधरी ने जताई नाराजगी
प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भाजपा जनप्रतिनिधियों को स्पष्ट रूप से आगाह किया है कि वे किसी तरह की नकारात्मक राजनीति का शिकार न बनें. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की बैठकों का कोई भी कृत्य भाजपा के संविधान एवं आदर्शो के अनुरूप नहीं माना जाना चाहिये. भाजपा और उसके कार्यकर्ता परिवार या वर्ग विशेष को लेकर राजनीति करने में विश्वास नहीं करते. ऐसी कोई भी गतिविधि भाजपा की संवैधानिक परंपराओं के अनुकूल नहीं.
बैठक से क्या निकला संदेश
ठाकुर विधायकों की कथित बैठक के बाद ब्राह्मण बीजेपी विधायकों और एमएलसी ने भी बैठक की. इसके बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है. सवाल यह नहीं है कि विधायक मिले या साथ बैठे. दरअसल, सवाल यह है कि यह बैठक किस मैसेज के साथ सामने आई और इस समय इसके क्या मायने है? हालांकि उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने तो बस यह कह दिया कि विधायकों का मिलना, बैठना अलग विषय है. इसको अलग चश्मे से नहीं देखना चाहिए. आइये इस बारे में जानते हैं.
किसके आवास पर हुई बैठक
बता दें कि मंगलवार की शाम कुशीनगर से भाजपा विधायक पीएन पाठक (पंचानंद पाठक) के लखनऊ स्थित आवास पर ब्राह्मण समाज से जुड़े विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की बैठक हुई. इस बैठक को औपचारिक तौर पर सहभोज का नाम दिया गया, लेकिन इसमें बड़ी संख्या में विधायकों और एमएलसी की मौजूदगी ने इसे साधारण सामाजिक मुलाकात से कहीं आगे का बना दिया. इस बैठक में विधायक शलभमणि त्रिपाठी, मिर्जापुर के विधायक रत्नाकर मिश्रा और एमएलसी उमेश द्विवेदी की सक्रिय भूमिका बताई जा रही है. सत्ताधारी दल के भीतर इस बैठक को लेकर खासी चर्चाएं हैं.
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प्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ें