भारत का ये गांव है पढ़े-लिखों की फैक्ट्री! यहां से निकलते हैं IAS और प्रोफेसर, लोग रहने के लिए तरसते हैं
Last Updated:
Asia Famous Educated Village: भारत सिर्फ अपने खान-पान और वेश-भूषा के लिए ही नहीं, बल्कि साक्षरता के मामले में भी आगे है. आज आपको भारत के एक ऐसे गांव के बारे में बताने वाले हैं, जो साक्षरता के मामले में पूरे एशिया में मशहूर है. कहते हैं कि यहां लोग खेती नहीं, बल्कि नौकरी पर विश्वास करते हैं.
अलीगढ़: भारत देश अपनी संस्कृति, खान-पान, कला और फिल्मों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साक्षरता के मामले में भी भारत किसी से पीछे नहीं है. उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के जवां ब्लॉक में बसा धोर्रा माफी गांव पूरे एशिया में मशहूर है. दरअसल, यह गांव भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया का सबसे पढ़ा-लिखा गांव है. अलीगढ़ के इस गांव के लोग खेती की बजाय नौकरी करते हैं. इसलिए यहां हाय एजुकेटेड लोग रहते हैं.
अलीगढ़ जिले के धोर्रा माफी गांव में करीब 10-12 हजार लोगों की आबादी है. गांव में करीब 90 फीसदी से ज्यादा लोग साक्षर हैं. इस गांव के करीब 80 फीसदी लोग देशभर में कई बड़े पदों पर तैनात हैं. गांव के कई लोग डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, प्रोफेसर और आईएएस अफसर बन चुके हैं. धोर्रा माफी गांव अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से सटा हुआ है. इसलिए वहां के प्रोफेसर और डॉक्टर्स ने गांव में अपना घर बनाया. जिस वजह से यह एशिया का सबसे पढ़ा-लिखा गांव कहलाने लगा.
‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में शामिल
अलीगढ़ के धोरा माफी नाम के इस गांव के स्थानीय निवासी आतिफ उर रहमान बताते हैं कि साल 2002 में धोर्रा माफी नाम के इस गांव का नाम ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में शामिल किया गया था. इस गांव का नाम गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड के लिए होने वाले सर्वे के लिए भी चुना गया था. धोर्रा माफी गांव में पक्के मकान, 24 घंटे बिजली-पानी और कई इंग्लिश मीडियम स्कूल व कॉलेज हैं. यहां के लोग खेती के बजाय नौकरी पर निर्भर हैं.
आईएएस और यूनिवर्सिटी में वाइस चांसलर
उन्होंने बताया कि शहर के धोर्रा माफी गांव के लोग काफी आत्मनिर्भर और शिक्षित हैं. साक्षरता के मामले में यहां की महिलाएं भी पुरुषों के समान ही हैं. इस गांव के डॉ. सिराज आईएएस अधिकारी हैं. इसके अलावा गांव के फैज मुस्तफा एक यूनिवर्सिटी में वाइस चांसलर रह चुके हैं. इसका बड़ा तबका विदेशों में भी रह रहा है.
साक्षरता के मामले में यह गांव हमेशा चर्चा में रहता है. वहीं अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर भी यहीं धोरा माफी में रहती हैं. फिलहाल यह गांव पिछले 2023 के नगर निगम चुनाव में नगर निगम की सीमा में आ चुका है.
About the Author
आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.