भेड़ पालन से इस किसान की बदल गई किस्मत! हर साल बेचता है 70-80 भेड़, लाखों में हो रही कमाई
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रामपुर के किसान राजू पाल ने खेती के साथ एक ऐसा व्यवसाय अपनाया है, जिससे हर कुछ महीनों में नियमित आय होती है. उन्होंने देशी भेड़ों का पालन शुरू किया और अब इससे अच्छी कमाई कर रहे हैं. खास बात यह है कि भेड़ें समय-समय पर बिक जाती हैं और हर भेड़ की कीमत भी अच्छी मिलती है. इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और खेती के साथ यह अतिरिक्त आय उन्हें वित्तीय सुरक्षा देती है.
रामपुर के किसान राजूपाल ने खेती के साथ भेड़ पालन शुरू किया. शुरुआत में उन्होंने कुछ ही देशी भेड़ें खरीदी थीं लेकिन धीरे-धीरे संख्या बढ़ाकर करीब 100 कर दी. उनका कहना है कि खेती के साथ यह काम आसानी से हो जाता है और ज्यादा खर्च भी नहीं आता. यही वजह है कि अब भेड़ पालन उनके लिए कमाई का मजबूत जरिया बन गया है.

राजूपाल बताते हैं कि देशी भेड़ों की डिमांड बाजार में हमेशा बनी रहती है. उनके झुंड से हर छह महीने में करीब 40 भेड़ें बेचने लायक हो जाती हैं. सालभर में लगभग 70 से 80 भेड़ें बिक जाती हैं. इससे उन्हें लगातार आमदनी मिलती रहती है और घर के खर्च के साथ खेती में भी पैसा लगाने में आसानी हो जाती है.

किसान के मुताबिक बाजार में एक अच्छी देशी भेड़ की कीमत 12 से 15 हजार रुपये तक मिल जाती है खास मौकों पर इसकी मांग और बढ़ जाती है ऐसे समय में कीमत और बेहतर मिलती है यही वजह है कि भेड़ पालन से उन्हें सालभर में अच्छी-खासी कमाई हो जाती है और मेहनत का सही फायदा मिलता है.
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राजूपाल बताते हैं कि देशी भेड़ों को पालने में महंगे चारे या खास इंतजाम की जरूरत नहीं पड़ती गांव के आसपास मिलने वाली घास और सामान्य चारा खाकर भी ये आसानी से पल जाती हैं इनकी साफ सफाई खास ध्यान रखना पड़ता है यही कारण है कि छोटे किसान भी कम लागत में इस काम को शुरू कर सकते हैं.

राजू रोज सुबह करीब 11 बजे भेड़ों को लेकर जंगल या खुले मैदान में चराने निकल जाते हैं वहां ये भेड़ें घास और झाड़ियों को चरती रहती हैं शाम करीब 5 बजे तक उनका पेट भर जाता है और फिर उन्हें वापस घर ले आते हैं इस तरह प्राकृतिक तरीके से ही भेड़ों का पालन हो जाता है और बाहर चराने से भेड़ें काफी सुरक्षित भी रहती है.

देशी भेड़ों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये स्थानीय मौसम में जल्दी ढल जाती हैं बीमारियां भी कम लगती हैं और देखभाल ज्यादा नहीं करनी पड़ती यही वजह है कि ग्रामीण इलाकों में किसान देशी नस्ल को ज्यादा पसंद करते हैं कम खर्च और कम मेहनत में इनसे अच्छा मुनाफा मिल जाता है.

किसान राजूपाल बताते हैं कि देशी भेड़ करीब 5 महीने में बच्चा दे देती है आमतौर पर एक भेड़ एक बार में एक या दो मेमने देती है यही वजह है कि झुंड जल्दी बढ़ने लगता है अगर 100 भेड़ें हों तो हर साल अच्छी संख्या में मेमने तैयार हो जाते हैं इन्हीं मेमनों को कुछ महीनों बाद बेचकर किसान को लगातार आमदनी मिलती रहती है.