मखाना की करनी है खेती, तो सरकार दे रही है मोटी सब्सिडी..जानिए पूरा प्रोसेस

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मखाना की करनी है खेती, तो सरकार दे रही है मोटी सब्सिडी..जानिए पूरा प्रोसेस


यदि आप किसान हैं और खेती करना जानते हैं, तथा आपके खेत में तालाब है या आपका खेत तीन फीट तक गहरा है, तो मखाना की खेती आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है. मखाना की मांग हमेशा बनी रहती है और इसकी खेती को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग द्वारा अच्छी सब्सिडी भी दी जा रही है. आइए जानते हैं इसकी खेती की पूरी प्रक्रिया और इससे जुड़ी जरूरी जानकारी.

मखाना की खेती के लिए 40,000 रुपये का मिलेगा अनुदान

लोकल 18 से बातचीत में जिला उद्यान अधिकारी संदीप गुप्ता ने बताया कि मखाना की वैश्विक मांग काफी ज्यादा है और इसे एक सुपरफूड के रूप में जाना जाता है. इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के तहत जनपद मऊ में 10 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मखाना की खेती शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है.

इस योजना के तहत मखाना की खेती करने वाले किसानों को ₹40,000 प्रति हेक्टेयर का अनुदान दिया जाएगा. इसमें बीज पर सब्सिडी के साथ-साथ तालाब की सफाई के लिए भी सहायता राशि दी जाएगी. यह सब्सिडी किसानों के खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी.

तालाबों में होती है मखाना की खेती

मखाना की खेती की तकनीकी जानकारी देने के लिए उद्यान विभाग किसानों को प्रशिक्षण भी देगा. इसके लिए स्थानीय संसाधनों के साथ-साथ उन किसानों से भी जोड़ा जाएगा जो पहले से इस खेती को सफलतापूर्वक कर रहे हैं. चंदौली और कुशीनगर के किसान इस खेती में अच्छा काम कर रहे हैं, जिनसे किसानों को उत्पादन की तकनीक सिखाई जाएगी.

मखाना की खेती उन स्थानों पर की जाती है जहां पानी का अच्छा साधन हो. इसके लिए 3 से 5 फीट गहरा तालाब उपयुक्त माना जाता है. इसकी बुवाई का सही समय फरवरी से मार्च के बीच होता है और यह लगभग 6 से 8 महीने की फसल होती है. बुवाई के बाद पौधे तालाब में स्वयं विकसित होने लगते हैं.

दो तरीकों से की जाती है मखाना की खेती

मखाना की खेती मुख्य रूप से दो तरीकों से की जाती है. पहला तरीका यह है कि खेत में लगभग तीन फीट तक पानी भरकर उसमें खेती की जाए. दूसरा तरीका तालाब में इसकी खेती करना है. उद्यान विभाग के अनुसार तालाब में खेती करना ज्यादा आसान और उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि अधिकतर किसानों के पास तालाब होते हैं जबकि तीन-चार फीट गहरे खेत कम ही मिलते हैं. यह खेती पूरी तरह पानी पर आधारित होती है और इसका उत्पादन भी पानी में ही होता है.

उद्यान विभाग सिखाएगा मखाना की खेती

किसानों को मखाना की खेती की सही तकनीक सिखाने के लिए उद्यान विभाग उन्हें दरभंगा (बिहार) ले जाकर प्रशिक्षण भी दिलाएगा. इससे किसान आधुनिक तकनीक सीखकर मऊ जिले में बेहतर तरीके से मखाना की खेती कर सकेंगे और अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत बना सकेंगे.

यदि कोई किसान मखाना की खेती करना चाहता है, तो वह उद्यान विभाग में संपर्क कर अपना पंजीकरण करा सकता है. पंजीकरण के बाद पूरी प्रक्रिया पूरी होने पर विभाग द्वारा ₹40,000 प्रति हेक्टेयर के हिसाब से अनुदान प्रदान किया जाएगा.



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