मजदूरी मांगा तो गुड़ के खौलते कड़ाही में धकेला, 12 दिन बाद युवक की मौत
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Lakhimpur Kheri News: यूपी के लखीमपुर खीरी में एक युवक को अपनी मजदूरी मांगना महंगा पड़ गया. आरोप है कि 11 मार्च को कुलदीप ने साजिद खान से अपनी बकाया मजदूरी मांगी तो उसके साथ मारपीट की गई. फिर उसे खौलते गुड़ की कड़ाही में फेंक दिया. बुरी तरह से झुलसे कुलदीप की 12 दिन बाद मौत हो गई.
लखीमपुर खीरी में युवक को गुड़ के कड़ाही में धकेला (प्रतीकात्मक फोटो)
लखीमपुर खीरी. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में एक दुखद घटना सामने आई है. यहां एक 36 वर्षीय दलित मजदूर कुलदीप कुमार की मौत हो गई. आरोप है कि उसने बकाया मजदूरी मांगी तो उसे उबलते गुड़ के भरे बर्तन में धकेल दिया गया. गंभीर रोप्प से झुलसे कुलदीप की 12 दिन बाद इलाज के दौरान मौत हो गई.
कुलदीप पिछले पांच महीनों से साजिद खान के गुड़ बनाने वाले खांडसारी यूनिट पर काम कर रहा था. 11 मार्च 2026 को शाम करीब 4.30 बजे उसने अपनी बकाया मजदूरी मांगी. इस पर साजिद खान, राशिद खान और हमीद खान ने उसके साथ गाली-गलौज की, मारपीट की और आरोप के अनुसार उसे उबलते गुड़ के सिरप वाले बर्तन में धकेल दिया. इससे कुलदीप बुरी तरह झुलस गया. जिसके बाद आरोपी पहले उसे अस्पताल ले गए और परिवार को बाद में बताया. कुलदीप को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, फिर सिविल अस्पताल रेफर किया गया जहां एक दिन इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया. उसके बाद प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन वहां भी इलाज बंद कर दिया गया. लंबे इलाज के दौरान मंगलवार को कुलदीप की मौत हो गई.
पिता ने दर्ज कराई FIR
मृतक के पिता खेम करम ने नीमगांव पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने कहा, “उन्होंने मेरे बेटे को उबलते गुड़ के सिरप में धकेल दिया, जिससे वह बुरी तरह जल गया. पहले अस्पताल ले गए और हमें बाद में बताया. इलाज के दौरान ही उसकी मौत हो गई.” पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता बीएनएस की धारा 115, 118, 352 और एससी/एसटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है. खीरी के एएसपी अमित कुमार राय ने कहा, “हम दोनों पक्षों की बात सुन रहे हैं. घटना 11 मार्च की है. कुलदीप तब से अलग-अलग अस्पतालों में इलाज करा रहा था. परिवार ने मौत के बाद ही शिकायत की है. हम सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं.”
आरोपियों ने बताया दुर्घटना
आरोपियों के रिश्तेदार नासिर खान ने आरोपों से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि यह दुर्घटना थी, कुलदीप खुद गिर गया था और किसी ने धकेला नहीं. परिवार ने इलाज का खर्च भी उठाया था. पुलिस अभी मामले की आगे जांच कर रही है. यह घटना मजदूरों के अधिकारों और जातिगत मुद्दों को लेकर फिर से सवाल खड़े कर रही है.