मधुमक्खियों के छत्ते से शहद निकालने में उस्ताद है ये बच्चा, जरा सी चूक पड़ सकत

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मधुमक्खियों के छत्ते से शहद निकालने में उस्ताद है ये बच्चा, जरा सी चूक पड़ सकत


Agency:Local18

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बहराइच में शहद की मांग बढ़ी है, जिसे कुर्बान जैसे लोग ऊंची इमारतों से जोखिम उठाकर निकालते हैं. शहद स्वास्थ्य और सौंदर्य के लिए उपयोगी है. शहद निकालने में धुएं का उपयोग होता है, लेकिन सावधानी जरूरी है.

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जान जोखिम में डाल कर कुर्बान निकालते है शहद!

हाइलाइट्स

  • शहद की मांग बढ़ने से कुर्बान जैसे लोग जोखिम उठाकर शहद निकालते हैं.
  • कुर्बान ऊंची इमारतों से मधुमक्खियों के छत्ते से शहद निकालने में माहिर हैं.
  • शहद निकालने में धुएं का उपयोग होता है, लेकिन सावधानी जरूरी है.

बहराइच : आजकल शहद की बहुत मांग है. आयुर्वेद में शहद को अमृत माना जाता है. शहद खाने में ही नहीं, सुंदरता बढ़ाने के लिए भी उपयोगी होता है. रोज शहद खाने से शरीर को बहुत फायदे होते हैं. लोग तंदुरुस्त रहने, सुंदर दिखने और ताकत पाने के लिए शहद खाते हैं. शहद से हमें ऊर्जा मिलती है और हमारे शरीर में खून भी बढ़ता है. इसलिए आजकल शहद की मांग बहुत बढ़ रही है. लेकिन अगर आपको कोई बीमारी है, तो डॉक्टर से पूछे बिना शहद न खाएं.

टंकियों के बीच बने छत्तों से भी शहद निकालता है
बिहार के रहने वाले कुर्बान भाई बहराइच में ऊंची-ऊंची इमारतों पर लगे मधुमक्खी के छत्तों से शहद निकालकर बेचते हैं. कुर्बान भाई बताते हैं कि उन्हें इससे रोजाना 400 से ₹500 तक की कमाई हो जाती है, जिससे उनका घर चलता है. इस काम में बहुत खतरा होता है. एक तो मधुमक्खी के काटने का डर रहता है, दूसरा ऊंचाई से गिरने का भी डर रहता है. लेकिन कुर्बान भाई बताते हैं कि वह इस काम में माहिर हैं. वह ऊंची पानी की टंकियों के बीच बने छत्तों से भी शहद निकाल लेते हैं.

शहद निकालते समय बरतनी चाहिए सावधानी
शहद निकालने का सबसे अच्छा तरीका धुआं है. लेकिन इसमें बहुत सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि इससे आग लग सकती है. इस तरीके में, शहद निकालने वाला व्यक्ति छत्ते के नीचे धुआं करता है जिससे मधुमक्खियां छत्ता छोड़कर भाग जाती हैं. जब मधुमक्खियां चली जाती हैं, तो वह व्यक्ति खुरपी से सावधानी से शहद निकाल लेता है. इस दौरान उसे ध्यान रखना होता है कि धुआं बंद न हो, नहीं तो मधुमक्खियां हमला कर सकती हैं.

मधुमक्खियों के हमले से बचाव के तरीके!
कई बार बच्चे शहद निकालते समय गलती कर देते हैं या छत्ता ढूंढते समय कोई गलती हो जाती है. कभी-कभी बच्चों की गलती उन पर भारी पड़ जाती है और मधुमक्खियां उन पर हमला कर देती हैं. बच्चे भागते हुए दिखाई देते हैं. उनके पास बचाव के लिए धुआं या मिट्टी का तेल होता है, जो उन्हें मधुमक्खियों को भगाने में मदद करता है. लेकिन कई बार ऐसी स्थिति भी आ जाती है जब उनके पास बचने का कोई उपाय नहीं होता है. ऐसे में सीधा न भागकर टेढ़ा-मेढ़ा भागना चाहिए और अगर आस-पास कोई झाड़ी दिखे तो उसमें छिप जाना चाहिए. इससे बचने की संभावना बढ़ जाती है.

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