महाकुंभ: नहीं थम रहे खुशी के आंसू, बिछड़ने के 6 घंटे बाद मिले चाचा-भतीजी, गजब है बिहार के इस परिवार की कहानी

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महाकुंभ: नहीं थम रहे खुशी के आंसू, बिछड़ने के 6 घंटे बाद मिले चाचा-भतीजी, गजब है बिहार के इस परिवार की कहानी


Agency:News18 Uttar Pradesh

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Mahakubh: प्रयागराज महाकुंभ में डिजिटल खोया पाया केंद्र ने राम निहोर प्रसाद और उनकी भतीजी क्रांति को 6 घंटे बाद मिलाया. यह केंद्र बिछड़े परिवारों को मिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

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राम निहोर प्रसाद

हाइलाइट्स

  • महाकुंभ में डिजिटल खोया पाया केंद्र ने चाचा-भतीजी को मिलाया.
  • 6 घंटे बाद राम निहोर प्रसाद और क्रांति मिले.
  • डिजिटल केंद्र बिछड़े परिवारों को मिलाने में मदद कर रहा है.

प्रयागराज: महाकुंभ मेला, एक ऐसा अद्भुत संगम जहां आस्था और संस्कृति का अद्वितीय मिलन होता है. यहां करोड़ों श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती के पवित्र संगम में डुबकी लगाकर अपनी आत्मा को शुद्ध करते हैं. इस महाकुंभ में न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है, बल्कि यह एक ऐसा स्थान भी है जहां बिछड़े हुए परिवार दोबारा मिलते हैं.

प्रयागराज में चल रहे इस महाकुंभ में, डिजिटल खोया पाया केंद्र एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. यह केंद्र बिछड़े हुए लोगों को उनके परिवारों से मिलाने का काम कर रहा है. कुंभ वॉरियर्स, जो इस केंद्र में सेवा दे रहे हैं, लगातार श्रद्धालुओं की सहायता कर रहे हैं. वे न केवल लोगों को ढूंढने में मदद करते हैं, बल्कि उनके नामों की घोषणा करके उन्हें उनके प्रियजनों से मिलाते भी हैं.

ऐसे बिछड़े चाचा-भतीजी
ऐसे ही एक परिवार की कहानी है, जो इस महाकुंभ में बिछड़ गया था. बिहार के पटना जिले से आए राम निहोर प्रसाद अपनी भतीजी क्रांति के साथ संगम में स्नान करने आए थे. सुबह के 2:20 बजे थे, जब वे रेल घाट से संगम की ओर रवाना हुए. पीपा पुल संख्या 18 को पार करते हुए, लगभग 4:00 बजे वे संगम पर पहुंचे.

जैसे ही डुबकी लगाई…
राम निहोर प्रसाद और क्रांति दोनों ही संगम में डुबकी लगाने के लिए उत्सुक थे. क्रांति उनके कपड़ों को लेकर किनारे पर खड़ी थी. जैसे ही राम निहोर प्रसाद ने डुबकी लगाई और ऊपर आए, वे आगे बढ़ गए. इससे पहले कि क्रांति कुछ समझ पाती, वे बिछड़ गए.

पुलिस ने की मदद
राम निहोर प्रसाद, जो 75 वर्ष के थे, बिना कपड़ों के ठंड में कांप रहे थे. किसी तरह पुलिस वालों की मदद से वे खोया पाया केंद्र सेक्टर 4 पहुंचे. वहां उन्होंने अपनी भतीजी के बारे में बताया और कुंभ वॉरियर्स ने उनकी मदद करने का आश्वासन दिया.

6 घंटे बाद मिले
उधर, क्रांति भी परेशान थी. वह अपने चाचा को ढूंढने के लिए हर संभव प्रयास कर रही थी. लगभग 6 घंटे बाद, जब राम निहोर प्रसाद और क्रांति एक दूसरे से मिले, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. क्रांति ने कहा कि यह पुनर्जन्म जैसा अनुभव है.

एक नई उम्मीद
इस प्रकार, डिजिटल खोया पाया केंद्र ने एक बार फिर एक परिवार को मिलाया. यह केंद्र न केवल बिछड़ों को मिलाने का काम कर रहा है, बल्कि यह उन परिवारों को एक नई उम्मीद भी दे रहा है जो अपने प्रियजनों से बिछड़ गए हैं.

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