मार्च में ही गंगा का हाल मई जैसा, जलस्तर गिरने से पानी की किल्लत, खतरे में ये शहर

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मार्च में ही गंगा का हाल मई जैसा, जलस्तर गिरने से पानी की किल्लत, खतरे में ये शहर


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Kanpur Ganga water shortage : गंगा का जलस्तर तेजी से गिर रहा है. जलकल विभाग ने बंधा बनाने और ड्रेजिंग मशीन लगाने की योजना बनाई है. पानी बचाने की अपील की जा रही है.

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गंगा

हाइलाइट्स

  • गंगा का जलस्तर करीब एक फीट तक कम हो गया है.
  • जलकल विभाग ने 225 मीटर लंबा बंधा बनाने का फैसला किया.
  • शहर के लोगों से पानी बचाने की अपील की जा रही है.

कानपुर. जिस गंगा नदी से कानपुर शहर को रोजाना 20 करोड़ लीटर पानी मिलता है, वो अब सूखती नजर आ रही है. मार्च के महीने में ही गंगा का हाल मई जैसा हो गया है. गंगा बैराज पर दूर से ही रेत के टीले दिखने लगे हैं. जहां सावन के महीने में गंगा का पानी समुद्र जैसा नजर आता था, वहां अब उसकी धार आधी से भी कम हो गई है. गंगा के घटते जलस्तर ने नगर निगम और जलकल विभाग की चिंता बढ़ा दी है. मौजूदा समय में गंगा का जलस्तर 358 फीट पर पहुंच गया है, जबकि एक महीने पहले ये 359 फीट था, यानी एक महीने में जलस्तर एक फीट गिर चुका है. अगर यही हाल रहा तो मई-जून में पानी की भारी किल्लत हो सकती है.

सप्लाई जारी रखने की कोशिश
गंगा के घटते जलस्तर को देखते हुए जलकल विभाग ने शुक्लागंज के पास 225 मीटर लंबा बंधा बनाने का फैसला किया है. ये बंधा 80 हजार बालू भरी बोरियों से तैयार किया जाएगा, ताकि गंगा की धारा को नियंत्रित किया जा सके. इस बंधे का निर्माण मई से पहले पूरा करने की योजना है. इसके अलावा, भैरोघाट पंपिंग स्टेशन पर ड्रेजिंग मशीन लगाई गई है, ताकि बालू हटाई जा सके और पानी की आपूर्ति सुचारू रूप से जारी रहे. मई-जून में ऐसी और भी मशीनें लगाई जाएंगी, ताकि गर्मी में पानी की कमी से निपटा जा सके.

पानी बचाने की अपील
जलकल विभाग के जीएम आनंद त्रिपाठी ने शहरवासियों से पानी बचाने की अपील की है. उन्होंने कहा कि पानी की बर्बादी रोकना बेहद जरूरी है. लोग कार धोने, सड़कों पर पानी डालने और बेवजह पानी बहाने से बचें. पौधों में जरूरत से ज्यादा पानी डालने की जगह सीमित मात्रा में ही पानी का इस्तेमाल करें. पानी की टंकी भरते ही मोटर बंद कर दें, ताकि पानी व्यर्थ न जाए.

पानी सप्लाई का गणित

रोजाना 20 करोड़ लीटर पानी कानपुर की 60 लाख की आबादी को सप्लाई होता है. 28 जोनल पंपिंग स्टेशनों से 150 मोहल्लों में पानी पहुंचाया जाता है. सीएसए के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एसएन सुनील पांडेय का कहना है कि मार्च में ही तापमान 35 डिग्री तक पहुंच चुका है. अगर यही हाल रहा तो मई-जून में और अधिक गर्मी होगी, जिससे गंगा का जलस्तर और नीचे जा सकता है. जलकल विभाग ने शहर में चल रहे वॉशिंग सेंटरों पर कार्रवाई करने की योजना बनाई है. ये सेंटर बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद कर रहे हैं. जीएम आनंद त्रिपाठी के अनुसार, गंगा का जलस्तर जितना गिर रहा है, उसे देखकर साफ है कि स्थिति चिंताजनक है. लेकिन पानी की सप्लाई रोकने की नौबत नहीं आने देंगे.

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