मुरादाबाद में इस जगह पर सती होती थी महिलाएं, आज भी मौजूद हैं साक्ष्य, जानिए यहां का रहस्य

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मुरादाबाद में इस जगह पर सती होती थी महिलाएं, आज भी मौजूद हैं साक्ष्य, जानिए यहां का रहस्य


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Moradabad News: मुरादाबाद में सती मठ महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर हैं, जहाँ अतीत में महिलाओं ने आत्मसम्मान और परंपरा की रक्षा हेतु सती या जौहर किया था. इतिहासकारों के अनुसार संभल और पंवासा क्षेत्र में ऐसे कई स्थल बने. कई मठ समय के साथ नष्ट हुए, पर कई आज भी मौजूद हैं और पूजा-अर्चना होती है.

मुरादाबाद जनपद अपने भीतर कई ऐतिहासिक धरोहरों को समेटे हुए है, जिनमें सती मठ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं. ये मठ उन स्थानों पर बनाए गए थे, जहाँ अतीत में महिलाएँ अपने पति की मृत्यु या संकट के समय अपने आत्मसम्मान की रक्षा के लिए सती हो जाती थीं. समय बीतने के बावजूद ये स्थल आज भी स्थानीय लोगों की आस्था और परंपरा का हिस्सा हैं. लोग यहाँ पूजा-अर्चना करते हैं और उन महिलाओं की स्मृति में श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन्होंने अपने समय की परिस्थितियों में स्वयं को अग्नि को समर्पित किया था. सती मठ आज मुरादाबाद की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का एक महत्वपूर्ण अध्याय बने हुए हैं.

इतिहासकार डॉ. राजीव सक्सेना के अनुसार, प्राचीन काल में मुरादाबाद क्षेत्र उत्तर पांचाल का हिस्सा था. बाद के दौर में उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों की तरह यहां भी कई बाहरी शासकों और आक्रमणकारियों का प्रभाव बढ़ा. ऐतिहासिक संदर्भ बताते हैं कि कुतुबुद्दीन ऐबक के शासनकाल सहित मध्यकालीन समय में इस क्षेत्र पर कई सैन्य संघर्ष हुए. इन्हीं संघर्षों के दौर में संभल क्षेत्र, विशेषकर पंवासा में कई महिलाओं ने अपने आत्मसम्मान की रक्षा और पारिवारिक गौरव को बचाने के लिए जौहर किया. स्थानीय मान्यता है कि उन महिलाओं के सम्मान में बाद में यहाँ सती स्थल और मठ बनाए गए, जो आज भी स्थानीय धरोहर के रूप में मौजूद हैं.

डॉ. सक्सेना बताते हैं कि भारत के कई क्षेत्रों की तरह मुरादाबाद में भी महिलाओं ने विभिन्न ऐतिहासिक परिस्थितियों के दौरान आत्मत्याग किया. कुछ महिलाएँ अपने पति की मृत्यु के पश्चात सामाजिक मान्यताओं और परंपराओं के चलते सती हो जाती थीं, जबकि कुछ ने युद्धकालीन संकटों के समय खुद को अग्नि के हवाले कर दिया. स्थानीय किवदंतियों के अनुसार, कई स्थानों पर इन महिलाओं की अस्थियाँ मठों के स्तंभों या नींव के नीचे सुरक्षित की गई थीं, ताकि कोई उन्हें क्षति न पहुँचा सके. यद्यपि समय के साथ कई सती मठ नष्ट हो गए या अपने मूल स्वरूप में नहीं रहे, लेकिन पंवासा समेत कई क्षेत्रों में आज भी इन मठों के अवशेष मौजूद हैं. ये न केवल ऐतिहासिक धरोहर हैं बल्कि समाज की सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा भी, जिन्हें लोग आज भी सम्मान और श्रद्धा के साथ देखते हैं.

Lalit Bhatt

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों में रिपोर्टिंग से ल…और पढ़ें

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों में रिपोर्टिंग से ल… और पढ़ें

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