मेरठ: CCSU में AI मूल्यांकन का विरोध, छात्रों बोले- ‘पहले पढ़ाई का स्तर सुधारो’

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मेरठ: CCSU में AI मूल्यांकन का विरोध, छात्रों बोले- ‘पहले पढ़ाई का स्तर सुधारो’


मेरठ: बदलते दौर की डिजिटल क्रांति में जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हर क्षेत्र में अपनी पैठ बना रहा है, वहीं मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) में इस तकनीक का प्रवेश विवादों के घेरे में आ गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने मूल्यांकन की गुणवत्ता को विश्वस्तरीय बनाने के लिए कॉपियों की जांच एआई के माध्यम से कराने का प्रस्ताव रखा है. लेकिन प्रशासन का यह ‘स्मार्ट’ कदम छात्रों के गले नहीं उतर रहा है. छात्र संगठनों का तर्क है कि जिस विश्वविद्यालय में बुनियादी शिक्षा और कक्षाओं के संचालन की स्थिति जर्जर हो, वहां मूल्यांकन के लिए एआई का उपयोग छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है. इसी मुद्दे को लेकर ‘लोकल-18’ की टीम ने छात्र प्रतिनिधियों से खास बातचीत की, जिसमें कई गंभीर सवाल खड़े हुए हैं.

पहले मिले बेहतर शिक्षा, फिर हो एआई की बात
छात्र प्रतिनिधि शुभम भड़ाना ने विश्वविद्यालय के इस निर्णय को पूरी तरह से अतार्किक करार दिया है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि तकनीक का विरोध नहीं है, बल्कि तकनीक के गलत समय पर इस्तेमाल का विरोध है. भड़ाना का कहना है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन वास्तव में छात्रों का हित चाहता है, तो उसे कक्षाओं में बेहतर अध्ययन और आधुनिक शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराने के लिए एआई या अन्य तकनीकों का उपयोग करना चाहिए.

उन्होंने आरोप लगाया कि आधी-अधूरी शिक्षा और पारंपरिक तरीके से पढ़ाए गए छात्रों का आंकलन अगर हाई-टेक एआई से किया जाएगा, तो परिणाम न्यायपूर्ण नहीं होंगे. शुभम ने चेतावनी दी है कि यदि विश्वविद्यालय अपनी जिद पर अड़ा रहा, तो इसके खिलाफ एक बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा.

प्राइवेट परीक्षा फॉर्म और ओडीएल की ‘महंगी’ चुनौती
विवाद का एक बड़ा सिरा विश्वविद्यालय द्वारा प्राइवेट परीक्षा फॉर्म बंद करने की योजना से भी जुड़ा है. प्रशासन अब ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग कोर्स को बढ़ावा देने की बात कह रहा है. इस पर छात्रों का कहना है कि ग्रामीण और गरीब परिवेश से आने वाले हजारों छात्र प्राइवेट माध्यम से अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं. ओडीएल कोर्स के लिए जो फीस निर्धारित की गई है, वह प्राइवेट फॉर्म की तुलना में बहुत अधिक है. छात्रों की मांग है कि यदि प्राइवेट कोर्स बंद किए जा रहे हैं, तो ओडीएल की फीस को प्राइवेट के बराबर ही रखा जाए ताकि किसी भी मेधावी की शिक्षा न रुके.

कक्षाओं की हकीकत: किस्से-कहानियों में बीतता है समय
एक अन्य छात्र नेता अक्षय बैंसला ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता पर सीधा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि कैंपस और कॉलेजों में संचालित होने वाली कक्षाओं का हाल किसी से छिपा नहीं है. कई बार कक्षाओं में शिक्षक केवल किस्से-कहानियां सुनाकर समय बिता देते हैं. ऐसे माहौल में जहां नियमित पढ़ाई का स्तर औसत हो, वहां एआई से कॉपी जांचने की बात करना छात्रों पर मानसिक दबाव बनाने जैसा है. अक्षय का मानना है कि प्रशासन का ध्यान छात्रों को आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराने के बजाय केवल सतही बदलावों पर है, जो छात्र हितों के विपरीत है.

कमाई का जरिया न बने विश्वविद्यालय: पवनीश यादव
यूजीसी की नई शिक्षा नीति के तहत यदि प्राइवेट कोर्स संचालन में बाधाएं हैं, तो छात्रों का तर्क है कि प्रशासन को कोई ठोस और सुलभ विकल्प देना चाहिए. छात्र नेता पवनीश यादव ने बताया कि मेरठ और आसपास के क्षेत्रों के लाखों छात्र नौकरी के साथ-साथ अपनी पढ़ाई जारी रखते हैं. ऐसे कामकाजी छात्रों के लिए भारी-भरकम फीस देना संभव नहीं होगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि विश्वविद्यालय को एक ‘शिक्षण संस्थान’ की तरह व्यवहार करना चाहिए, न कि ‘कमाई के केंद्र’ की तरह.

टेक्नोलॉजी का फेल मॉडल: बायोमेट्रिक का बुरा हाल
छात्रों ने विश्वविद्यालय की वर्तमान तकनीक पर भी सवाल उठाए. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जो विश्वविद्यालय अपनी 75% बायोमैट्रिक अटेंडेंस के नियम को सही से लागू नहीं कर पा रहा है, वह एआई के माध्यम से कॉपियों का निष्पक्ष मूल्यांकन कैसे करेगा? छात्रों का आरोप है कि बायोमेट्रिक सिस्टम का हाल पहले से ही बुरा है, ऐसे में एआई के प्रयोग से मूल्यांकन में त्रुटियां होने की संभावना अधिक है, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर छात्रों को भुगतना पड़ेगा.



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