रमजान नवरात्रि में डबल खुशी! शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को बड़ी राहत, जानिए
गाजियाबाद. उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों को बड़ी राहत देते हुए उनके मानदेय में 8000 रुपए की बढ़ोतरी का ऐलान किया है. विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री ने यह महत्वपूर्ण घोषणा की. अब शिक्षामित्रों को 10,000 की जगह 18,000 रुपए प्रतिमाह मिलेंगे, जबकि अनुदेशकों का मानदेय 9,000 से बढ़ाकर 17,000 रुपए कर दिया गया है. मुख्यमंत्री के अनुसार, अप्रैल से बढ़ी हुई राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी जाएगी.
5 लाख तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा
मानदेय बढ़ाने के साथ ही सरकार ने शिक्षकों को 5 लाख तक की कैशलेस इलाज सुविधा देने की भी घोषणा की है. लंबे समय से स्वास्थ्य सुरक्षा की मांग कर रहे शिक्षामित्रों के लिए यह फैसला बड़ी राहत माना जा रहा है.
प्रदेशभर में खुशी की लहर
इस निर्णय के बाद पूरे प्रदेश में शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के बीच उत्साह का माहौल है. गाजियाबाद जिले में 464 शिक्षामित्र और 92 अनुदेशक कार्यरत हैं, जहां इस फैसले के बाद विशेष खुशी देखी जा रही है. आदर्श सामाजिक शिक्षक शिक्षामित्र वेलफेयर संघ, गाजियाबाद के जिला अध्यक्ष रिजवान राणा ने इसे वर्षों के संघर्ष का सकारात्मक परिणाम बताया और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया.
“घर में समय से पहले आई दीपावली, होली और ईद”
रिजवान राणा ने कहा कि यह फैसला शिक्षामित्रों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं है. उन्होंने बताया कि कई साल से मानदेय बढ़ाने की मांग की जा रही थी. प्रदेश में लगभग 1.72 लाख शिक्षामित्र इस निर्णय से सीधे लाभान्वित होंगे. उन्होंने भावुक होकर कहा कि खुशखबरी मिलते ही उन्होंने अपने परिवार और रिश्तेदारों को फोन कर यह जानकारी दी.
संघर्षों से भरा रहा सफर
शिक्षामित्रों ने कम मानदेय के कारण लंबे समय तक आर्थिक कठिनाइयों का सामना किया. कई बार उन्हें प्रदर्शन और आंदोलन भी करने पड़े. लाठीचार्ज जैसी घटनाओं का सामना करने के बावजूद उन्होंने अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखी. सरकार की ओर से कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा का निर्णय उनके बुजुर्ग माता-पिता और परिवार के लिए भी राहत भरा कदम माना जा रहा है.
शिक्षामित्र और अनुदेशकों की प्रतिक्रिया
शिक्षामित्र इंतजार अली ने इसे “सपने के सच होने” जैसा बताया. उन्होंने कहा कि 10,000 रुपए में परिवार चलाना मुश्किल था, लेकिन अब 18,000 मिलने से सम्मानजनक जीवन संभव होगा. अनुदेशक रिचा चौधरी ने भी सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि साल 2013 में 7,000 से शुरू हुआ सफर अब 17,000 तक पहुंच गया है, जो अनुदेशकों के मनोबल को मजबूत करेगा.
1999 से शुरू हुआ शिक्षामित्रों का सफर
शिक्षामित्र योजना की शुरुआत साल 1999 में हुई थी. तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के ग्रामीण रोजगार के विजन को आगे बढ़ाते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने इस योजना को लागू किया. आज शिक्षामित्र केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जनगणना, बीएलओ ड्यूटी, सर्वेक्षण और अन्य प्रशासनिक कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
वर्षों के संघर्ष की जीत
सरकार के इस निर्णय को शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के वर्षों के धैर्य, संघर्ष और समर्पण की जीत के रूप में देखा जा रहा है. मानदेय वृद्धि और स्वास्थ्य सुविधा से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि सामाजिक सम्मान भी बढ़ेगा.