रात में कुत्ते-बिल्ली का रोना! अनहोनी का संकेत या अंधविश्वास? जानें दादी-नानी के किस्से
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Rampur News : रात में कुत्ते या बिल्ली का रोना अक्सर लोगों को डरा देता है. दादी-नानी के जमाने में इसे अनहोनी या किसी बुरी घटना का संकेत माना जाता था. उनका मानना था कि जानवर इंसानों से पहले खतरे को भांप लेते हैं. हालांकि विज्ञान इसे अंधविश्वास बताता है, लेकिन आज भी कई लोग ऐसे अनुभवों को नज़रअंदाज़ नहीं कर पाते.
रामपुर : बचपन में दादी-नानी कहा करती थीं कि अगर रात में कोई जानवर रोए या अजीब आवाज करे, तो उसे तुरंत भगा देना चाहिए. तब हम इन बातों पर हंसते या डर जाते थे, लेकिन अब समझ आता है कि उनकी कहावतें अनुभव और चेतावनी से भरी थीं. उन्होंने प्रकृति और जानवरों के हर व्यवहार को ध्यान से देखा और हमें सिखाया कि यह कई बार आने वाले बदलाव या खतरे का संकेत होता है.
छुपा होता है अनहोनी का संकेत?
रामपुर के अजीमनगर थाना क्षेत्र की 40 वर्षीय दादी मुन्नी देवी बताती हैं कि उनके समय में जानवरों का रोना या अजीब हरकतें करना एक आम बात थी, जिसे लोग किसी अनहोनी का संकेत मानते थे. उन्होंने कहा कि एक बार उनके घर के पास दो बिल्लियाँ लगातार रो रही थीं और अगले दिन उसी घर की लड़की का एक्सीडेंट हो गया. ऐसे कई अनुभव उन्होंने अपने जीवन में देखे हैं. जब उनकी छत पर दो दिन लगातार बिल्ली रोती रही थी, तो उनके अपने बेटे के साथ भी बड़ा हादसा हुआ था.
क्या कहता है विज्ञान?
मुन्नी देवी का कहना है कि जानवर इंसानों से ज्यादा संवेदनशील होते हैं, वे आस-पास होने वाले परिवर्तनों या खतरों को पहले ही महसूस कर लेते हैं. कुत्ते का रोना अक्सर झगड़े या दुर्घटना का संकेत माना जाता था. इसलिए अगर कोई जानवर रात में लगातार रोता, तो उसे भगा दिया जाता था क्योंकि इसे अशुभ समझा जाता था. हालांकि विज्ञान इस बात का समर्थन नहीं करता, लेकिन आज भी कई लोग मानते हैं कि जानवरों का व्यवहार आने वाले बदलावों की चेतावनी हो सकता है. इसीलिए जब भी रात में कोई जानवर असामान्य आवाज करता है, तो लोग सावधान हो जाते हैं और अपने काम-काज में सतर्कता बरतते हैं.
मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु…और पढ़ें
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