रामपुर रज़ा लाइब्रेरी की सलाहकार समिति में शामिल हुईं डॉ. सय्यद मुबीन ज़ेहरा

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रामपुर रज़ा लाइब्रेरी की सलाहकार समिति में शामिल हुईं डॉ. सय्यद मुबीन ज़ेहरा


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दिल्ली विश्वविद्यालय केआत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज की मशहूर इतिहासकार डॉ. सय्यद मुबीन ज़ेहरा को विश्व प्रसिद्ध ‘रामपुर रज़ा लाइब्रेरी’ की प्रकाशन सलाहकार समिति का सदस्य नियुक्त किया गया है. उत्तर प्रदेश की राज्यपाल की अध्यक्षता में हुई 53वीं बोर्ड बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया. डॉ. ज़ेहरा के व्यापक अनुभव से 18वीं शताब्दी की इस लाइब्रेरी की दुर्लभ पांडुलिपियों, शोध ग्रंथों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के प्रकाशन व अनुवाद कार्य को नई दिशा और वैश्विक पहचान मिलने की उम्मीद है.

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रामपुर रज़ा लाइब्रेरी की सलाहकार समिति में शामिल हुईं डॉ. सय्यद मुबीन ज़ेहरा

रामपुर: दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज की इतिहास विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सय्यद मुबीन ज़ेहरा के नाम एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है. उत्तर प्रदेश की विश्व प्रसिद्ध 18वीं शताब्दी की ‘रामपुर रज़ा लाइब्रेरी’ की प्रकाशन सलाहकार समिति में उन्हें सदस्य के रूप में नामित किया गया है. यह निर्णय रामपुर रज़ा पुस्तकालय बोर्ड की 53वीं बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता खुद उत्तर प्रदेश की राज्यपाल ने की.

निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र ने दी बधाई
रामपुर रज़ा लाइब्रेरी एंड म्यूजियम के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र ने एक औपचारिक पत्र के जरिए डॉ. ज़ेहरा को इस नियुक्ति पर बधाई दी है. उन्होंने विश्वास जताया कि डॉ. मुबीन ज़ेहरा के व्यापक अनुभव और अकादमिक पकड़ से संस्थान को एक नई दिशा मिलेगी. डॉ. मिश्र ने कहा कि डॉ. ज़ेहरा की विशेषज्ञता से पुस्तकालय की प्रकाशन गतिविधियों-विशेषतः शोधपरक ग्रंथों के संपादन एवं प्रकाशन, दुर्लभ पांडुलिपियों के प्रकाशन, पुनर्मुद्रण, अनुवाद तथा विद्वत् सामग्री के चयन एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त होगा.

दुर्लभ ज्ञान का खजाना है रज़ा लाइब्रेरी
बता दें कि रामपुर रज़ा लाइब्रेरी केवल एक पुस्तकालय नहीं, बल्कि भारतीय इस्लामी सांस्कृतिक विरासत का अनमोल भंडार है. यहां सदियों पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां, ऐतिहासिक दस्तावेज, इस्लामी सुलेख के नमूने, लघु चित्र और खगोलीय उपकरण मौजूद हैं. अरबी और फारसी भाषा के दुर्लभ सचित्र कार्यों का यहां ऐसा संग्रह है जो दुनिया में कहीं और मिलना मुश्किल है.

कौन हैं डॉ. सय्यद मुबीन ज़ेहरा?
डॉ. सय्यद मुबीन ज़ेहरा देश की जानी-मानी इतिहासकार हैं. उनकी शैक्षणिक योग्यता और अनुभव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनकी लिखी दर्जनों पुस्तकें विभिन्न विश्वविद्यालयों में ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन के छात्र पढ़ते हैं. वे केवल शिक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि महिला सशक्तिकरण के मुद्दों पर भी मुखर रहती हैं. उनके सामाजिक कार्यों के लिए उन्हें दो बार प्रतिष्ठित ‘लाडली मीडिया अवार्ड’ से भी नवाजा जा चुका है.

इन महत्वपूर्ण पदों पर भी हैं काबिज
डॉ. ज़ेहरा की सक्रियता कई सरकारी और शैक्षणिक संस्थानों में है. वे भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के तहत आने वाली ‘राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद’ की धर्म और संस्कृति समिति की सदस्य भी हैं. इसके अलावा, जामिया मिल्लिया इस्लामिया के डॉ. केआर नारायणन केंद्र (दलित और अल्पसंख्यक अध्ययन) की अनुसंधान समिति में भी वे बाहरी सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें



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