लाइसेंस वाली ये खेती बना रही है किसानों को लखपति! मगर रहना पड़ता है दिन-रात चौकन्ना, वरना…
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Afeem Ki Kheti: बाराबंकी में अफीम की खेती किसानों के लिए सोने की खान साबित हो रही है. ‘काला सोना’ कहलाने वाली इस फसल की देश-विदेश में इतनी भारी मांग है कि लाइसेंस प्राप्त किसान इससे लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं.
बाराबंकी: हमारे देश में कुछ ऐसी फसलें हैं जिनकी खेती से किसान लाखों रुपये का मुनाफा कमा सकते हैं. इन्हीं में से एक है अफीम, जिसे ‘काला सोना’ (Afeem Ki Kheti) भी कहा जाता है. इसकी मांग भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बहुत अधिक है, क्योंकि इसका उपयोग कई तरह की दवाइयों और खास उत्पादों को बनाने में किया जाता है. भारत में अफीम की खेती पूरी तरह लाइसेंसी प्रणाली के तहत होती है. सरकार निर्धारित मानकों और शर्तों के आधार पर ही इसके लिए लाइसेंस जारी करती है, ताकि उत्पादन सीमित रहे और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके. यही वजह है कि अफीम की लाइसेंसी खेती किसानों के लिए बेहद लाभदायक होती है.
अफीम की खेती के लिए लाइसेंस जरूरी
जिला कृषि अधिकारी राजितराम ने बताया कि अफीम की खेती के लिए नारकोटिक्स विभाग द्वारा जो लाइसेंस जारी किया जाता है, उसमें निश्चित समय और निश्चित मात्रा का उत्पादन तय होता है. किसान को उतना उत्पादन देना ही होता है. लेकिन अगर चोरी, जानवरों के नुकसान, या रोग और कीटों के कारण फसल प्रभावित होती है, तो उत्पादन कम हो जाता है. ऐसी स्थिति में किसान पूरा उत्पादन जमा नहीं कर पाता. इसका सीधा असर उसके लाइसेंस पर पड़ता है और विभाग लाइसेंस निरस्त भी कर सकता है. इसी डर से किसान समय-समय पर फसल की पूरी देखभाल करते रहते हैं.
अफीम को काला सोना इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसकी अंतरराष्ट्रीय कीमत लाखों और करोड़ों में होती है. यही कारण है कि इस फसल की सुरक्षा बेहद मुश्किल हो जाती है. किसानों के अनुसार, चोर, उचक्के और बदमाश अक्सर अफीम के खेतों पर निगाह रखे रहते हैं. मौका मिलते ही वे अफीम लूट ले जाते हैं. अफीम की चोरी किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या है. इस वजह से किसान अपनी जान जोखिम में डालकर फसल को बचाते हैं. हालांकि फसल के तैयार होने पर उन्हें मोटा मुनाफा मिलता है.
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सोने-चांदी से भी कीमती है अफीम
अफीम की खेती करने वाले किसानों ने बताया कि उनके इलाके में अफीम बड़े पैमाने पर उगाई जाती है. उन्हें इसे काला सोना इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसकी कीमत सोने और चांदी से भी ज्यादा होती है. अफीम का उपयोग कई तरह की दवाइयों में किया जाता है, और इसका कुछ हिस्सा लोग नशे के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं.
किसानों ने यह भी बताया कि अफीम का पौधा केवल कच्चे रूप में ही कीमती नहीं होता, बल्कि उसका डंठल, दाना और फोकलाई भी बहुत महंगे दामों में बिकता है. यही कारण है कि इस फसल को जानवरों से ज्यादा चोरों और बदमाशों से बचाना पड़ता है. देश ही नहीं विदेशों में इसकी भारी मांग रहती है.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मैने शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 ( नेटवर्क 18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News 18 (नेटवर्क 18) के साथ जुड़ी हूं…और पढ़ें