विधवा को अपने ससुर से भरण-पोषण मांगने का अधिकार.. हाईकोर्ट का अहम फैसला

0
विधवा को अपने ससुर से भरण-पोषण मांगने का अधिकार.. हाईकोर्ट का अहम फैसला


Last Updated:

Allahabad High Court News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि मौत के बाद भी पति अपनी पत्नी के भरण पोषण के लिए बाध्य है. कोर्ट ने कहा कि विधवा को अपने ससुर से भरण पोषण मांगने का कानूनी अधिकार है.

ख़बरें फटाफट

Zoom

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भरण पोषण को लेकर दिया अहम फैसला

प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि पति की अपनी पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी उसकी मृत्यु के बाद भी समाप्त नहीं होती. ऐसे में विधवा को अपने ससुर से भरण-पोषण मांगने का अधिकार है. कोर्ट ने कहा, “यह स्थापित सिद्धांत है कि पति अपनी पत्नी के भरण-पोषण के लिए बाध्य है. यह दायित्व उसकी मृत्यु के बाद भी जारी रहता है और कानून विधवा को ससुर से भरण-पोषण मांगने की अनुमति देता है.

हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी अकुल रस्तोगी की अपील पर की. पति ने परिवार न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी पत्नी के खिलाफ झूठा बयान देने की कार्रवाई की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया. जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्यवीर सिंह की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई. पति का आरोप था कि पत्नी ने भरण-पोषण पाने के लिए गलत जानकारी दी और खुद को गृहिणी बताया जबकि वह नौकरी करती है. उसने यह भी दावा किया कि पत्नी के पास 20 लाख रुपये से अधिक की एफडी थी जिसे उसने छिपाया. अदालत ने पाया कि पति अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका. कोर्ट ने कहा कि यह साबित करने की जिम्मेदारी पति की थी कि पत्नी नौकरी कर रही है. केवल यह कह देना कि पत्नी काम करती है, पर्याप्त नहीं है. एफडीआर के मुद्दे पर अदालत ने कहा कि ये धनराशि पत्नी को उसके पिता से मिली थी.

पति की अपील खारिज

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि विवाह के बाद पिता की अपनी बेटी के भरण-पोषण की सामान्यतः कोई जिम्मेदारी नहीं होती, सिवाय उस स्थिति के जब वह विधवा हो. कोर्ट ने यह भी गौर किया कि पत्नी ने अपनी आवश्यकताओं के लिए एफडीआर का अधिकांश हिस्सा निकाल लिया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उसे भरण-पोषण की जरूरत है. हाईकोर्ट ने कहा कि केवल कुछ तथ्यों का उल्लेख न करना या पूरी जानकारी न देना, अपने आप में झूठा बयान नहीं माना जा सकता. अंततः अदालत ने पाया कि पत्नी के खिलाफ कोई ठोस आधार नहीं है. हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद पति की अपील खारिज कर दी. कोर्ट ने साथ ही यह भी दोहराया कि कानून के तहत यदि विधवा अपने पति की संपत्ति, अपने माता-पिता या बच्चों से भरण-पोषण प्राप्त करने में असमर्थ है, तो वह ससुर या उसकी संपत्ति से गुजारा भत्ता मांग सकती है, बशर्ते उसका पुनर्विवाह न हुआ हो.

About the Author

authorimg

Amit Tiwariवरिष्ठ संवाददाता

अमित तिवारी, News18 Hindi के डिजिटल विंग में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. वर्तमान में अमित उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, ब्यूरोक्रेसी, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और रिसर्च बेस्ड कवरेज कर रहे हैं. अख़बार…और पढ़ें



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *