संकट में अलीगढ़ का ताला, बिजनेस में बड़ी गिरावट, कारोबारी हुए परेशान, जानिए क्या है वजह
Last Updated:
Aligarh News: अलीगढ़ का ताला उद्योग चीन के सस्ते तालों और बढ़ती लागत के कारण संकट में है, आगाज़ खान ने कारोबार की गिरावट और एक्सपोर्ट में कमी की बात कही.
वसीम अहमद /अलीगढ़. उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ का ताला उद्योग देशभर में अपनी मजबूती और सुरक्षा के लिए जाना जाता है. कभी विदेशों तक अपनी पहचान बनाने वाला यह कारोबार आज चीन की सस्ती और आकर्षक क्वालिटी वाले तालों की वजह से भारी चुनौतियों का सामना कर रहा है. लगातार बढ़ते रॉ मटेरियल के दाम और कारोबार में गिरावट ने इस परंपरागत उद्योग की स्थिति को और भी मुश्किल बना दिया है. इसी कड़ी मे यहाँ साइड शटर लॉक भी बड़े पैमाने पर बनता है जो विदेशों के अलावा देश भर मे सप्लाई होता था. लेकिन अब इसकी डिमांड सिर्फ देश तक सिमित रह गई है.
जानकारी देते हुए ताला कारोबारी आगाज़ खान बताते हैं कि अलीगढ़ का ताला उद्योग अपनी पुरानी पहचान और मजबूती के लिए मशहूर है. हमारे यहां शटर लॉक बनते हैं. हमारी लॉक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट इसी विरासत को आगे बढ़ा रही है. कंपनी को अपनी निजी मैन्युफैक्चरिंग शुरू किए लगभग 15 साल हो चुके हैं, जबकि अलीगढ़ में यह ताला करीब 40 साल से बन रहा है. हमारे यहां रोज़ाना लगभग 300 ताले तैयार किए जाते हैं. इन तालों की क्वालिटी और वैरायटी के हिसाब से कीमत अलग-अलग होती है. सामान्य तौर पर इनकी कीमत ₹130 से लेकर ₹300 तक रहती है. ये लॉक मुख्य रूप से साइड शटर, मेन डोर और अन्य जगहों पर लगाए जाते हैं. हैवी ड्यूटी और मल्टीपर्पज़ इस्तेमाल के कारण इनकी सुरक्षा पर लोगों का भरोसा रहता है.
ताला कारोबारी आगाज़ खान ने कहा कि मौजूदा समय में कारोबार की स्थिति बेहद खराब है. चीनी लॉक ने भारतीय बाज़ार में बड़ी जगह बना ली है. जिससे अलीगढ़ के ताला कारोबार पर गहरा असर पड़ा है. वहीं, लगातार बढ़ती रॉ मटेरियल की कीमत और टैक्सेशन की समस्याओं ने भी काम को प्रभावित किया है. पहले अलीगढ़ के ताले बड़ी संख्या में विदेशों मे खासकर मिडिल ईस्ट में एक्सपोर्ट होते थे. लेकिन अब वहां चीन का कब्ज़ा हो चुका है. अब यह कारोबार मुख्य रूप से सिर्फ भारतीय स्तर तक सीमित होकर रह गया है.
पिछले एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हूं. पत्रकारिता की शुरुआत 2010 में नई दुनिया अखबार से की, जिसके बाद सफर लगातार आगे बढ़ता गया. हिंदुस्तान, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया और ईटीवी जैस…और पढ़ें
पिछले एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हूं. पत्रकारिता की शुरुआत 2010 में नई दुनिया अखबार से की, जिसके बाद सफर लगातार आगे बढ़ता गया. हिंदुस्तान, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया और ईटीवी जैस… और पढ़ें