सफेद मक्खी, फल छेदक, सुंडी, अगेती झुलसा, अप्रैल में टमाटर की फसल पर बढ़ा रोग कीट का खतरा

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सफेद मक्खी, फल छेदक, सुंडी, अगेती झुलसा, अप्रैल में टमाटर की फसल पर बढ़ा रोग कीट का खतरा


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मौसम बदलते ही अप्रैल में टमाटर की फसल पर बढ़ा रोग कीट का खतरा, जाने बचाव

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मार्च से अप्रैल महीने में मौसम परिवर्तन के साथ गर्मी की शुरुआत हो जाती है. इस दौरान टमाटर की फसल पर कई तरह के रोग और कीट लगने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए टमाटर की खेती करने वाले किसानों को कुछ जरूरी एहतियात बरतनी चाहिए, जिससे फसल में किसी भी प्रकार के रोग और कीट का खतरा न रहे. समय समय पर एक्सपर्ट द्वारा बताए गए घोल का छिड़काव भी करना चाहिए.

मौसम में बदलाव का असर आम जनजीवन के साथ-साथ फसलों पर भी दिख रहा है. खासकर टमाटर की फसल पर इसका सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ रहा है, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं. टमाटर की फसल में रोग और कीट लगने से किसानों को फसल का नुकसान होता है और आर्थिक तौर पर भी नुकसान झेलना पड़ता है.

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रायबरेली जिले के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के प्रभारी अधिकारी शिव शंकर वर्मा, जिनके पास कृषि के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है, बताते हैं कि मार्च महीने में मौसम परिवर्तन के साथ गर्मी की शुरुआत हो जाती है. इस दौरान टमाटर की फसल पर कई तरह के रोग और कीट लगने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए टमाटर की खेती करने वाले किसानों को कुछ जरूरी एहतियात बरतनी चाहिए, जिससे फसल में किसी भी प्रकार के रोग और कीट का खतरा न रहे.

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फल छेदक कीट, यह कीट फल में छेद करके अंदर का भाग खा जाता है, जिससे फल खराब होकर गिर जाते हैं. खेत में फेरोमोन ट्रैप (5 प्रति एकड़) लगाएं. नीम आधारित कीटनाशक (नीम तेल 1500 PPM, 5ml प्रति लीटर पानी) का छिड़काव करें. स्पिनोसैड 45% SC (1ml प्रति 4 लीटर पानी) या फ्लुबेंडियामाइड 20% WG (0.5g प्रति लीटर) का छिड़काव करें.

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सफेद मक्खी: यह पत्तियों का रस चूसकर पौधे को कमजोर कर देती है और टमाटर में “लीफ कर्ल वायरस” भी फैलाती है.रोकथाम के लिए  पीले चिपचिपे कार्ड लगाएं. नीम तेल (5 ml प्रति लीटर पानी) का छिड़काव करें.  थायोमेथोक्साम 25% WG (0.3g प्रति लीटर पानी) का उपयोग करें.

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पत्ती खाने वाली सुंडी: यह पत्तियों को खाकर केवल शिराएं छोड़ देती है और बढ़ने पर फल को भी नुकसान पहुंचा सकती है. इनसे बचाव के लिए खेत में प्रकाश प्रपंच लगाएं. बैवेरिया बेसियाना (जैविक फफूंदनाशी) का छिड़काव करें.  क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 18.5% SC (0.3ml प्रति लीटर पानी) का छिड़काव करें.

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अगेती झुलसा: पत्तियों पर भूरे-काले धब्बे बनते हैं और फल और तनों पर भी धब्बे दिखाई देते हैं.  रोकथाम: साफ-सुथरे बीज का प्रयोग करें. मैन्कोजेब 75% WP (2.5g प्रति लीटर पानी) या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (3g प्रति लीटर पानी) का छिड़काव करें.

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पछेती झुलसा: पत्तियों और तनों पर पानी से भरे धब्बे बनते हैं, जिससे पौधे मुरझा जाते हैं. रोकथाम: मेटालैक्सिल + मैन्कोजेब (2.5g प्रति लीटर पानी) का छिड़काव करें. खेत में उचित दूरी बनाए रखें और जलभराव न होने दें.

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टमाटर लीफ कर्ल वायरस: पत्तियां सिकुड़कर ऊपर की ओर मुड़ जाती हैं, जिससे पौधा बौना रह जाता है और फल नहीं बनते हैं. रोकथाम: सफेद मक्खी नियंत्रण जरूरी है (थायोमेथोक्साम या इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव करें).  रोगग्रस्त पौधों को तुरंत हटा दें.



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