‘साहब! वो मर रहा था और अधिकारी तमाशा देख रहे थे…’ नोएडा हादसे के उस जांबाज की जुबानी, जिसने बचाने के लिए लगा दी जान की बाजी
Noida Techie Death Case: उत्तर प्रदेश के नोएडा में शनिवार रात एक दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया. सेक्टर-150 में पानी से भरे एक गहरे गड्ढे में डूबने से 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई. लेकिन इस घटना के बाद जो हकीकत सामने आई है, वह सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करती है. घटना के बाद अब वहां 16 लोहे की बैरिकेडिंग खड़ी कर दी गई हैं.
इस मंजर को देखकर फ्लिपकार्ट में काम करने वाले डिलीवरी एग्जीक्यूटिव मोनिंदर की आंखों में गुस्सा और दर्द दोनों है. मोनिंदर वही शख्स हैं जिन्होंने कड़कड़ाती ठंड में युवराज को बचाने के लिए उस खौफनाक गड्ढे में छलांग लगा दी थी.
‘अधिकारी तमाशा देखते रहे, कोई नहीं कूदा’
मोनिंदर का आरोप है कि जब वह मौके पर पहुंचे, तब तक प्रशासन के लोग वहां मौजूद थे. युवराज कार की छत पर लेटा हुआ था और मोबाइल की टॉर्च जलाकर मदद की गुहार लगा रहा था. मोनिंदर बताते हैं, ‘फायर ब्रिगेड की टीम के पास सीढ़ी थी, सेफ्टी जैकेट थी, लेकिन वे किनारे बैठकर इंतजार कर रहे थे. उन्होंने मुझसे पानी में उतरने को कहा, और मैं कूद गया. लेकिन वे पहले से वहां थे, उन्होंने कोशिश क्यों नहीं की?’
मोनिंदर के अनुसार, प्रशासन की लापरवाही ने एक हंसते-खेलते परिवार का चिराग बुझा दिया. वह कहते हैं कि अगर अधिकारी चाहते तो युवराज को बचाया जा सकता था.
हादसे वाली जगह पर अब लोहे की नई बैरिकेडिंग चमक रही हैं. मोनिंदर सवाल पूछते हैं, ‘ये बैरिकेडिंग 15 साल पहले क्यों नहीं लगीं? क्या सिस्टम हमेशा किसी की मौत के बाद ही जागता है?’ बता दें कि मृतक युवराज मेहता टाटा युरेका पार्क सोसाइटी में रहते थे. शनिवार रात गुरुग्राम से ऑफिस का काम खत्म कर लौटते समय उनकी कार एक निर्माणाधीन मॉल के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे में गिर गई थी. कोहरा होने के कारण वहां न तो कोई रिफ्लेक्टर था और न ही कोई चेतावनी बोर्ड.
हैरानी की बात यह है कि इसी गड्ढे में करीब दो हफ्ते पहले भी एक ट्रक गिर गया था. उस समय भी मोनिंदर ने ही ट्रक ड्राइवर गुरिंदर की जान बचाई थी. गुरिंदर बताते हैं, ‘इलाके में कोई रिफ्लेक्टर नहीं है. मेरा ट्रक गड्ढे में गिरा तो मुझे लगा नीचे जमीन है, लेकिन मैं सीधे पानी में जा गिरा. मोनिंदर ने रस्सी के सहारे मुझे बाहर निकाला. जब हमने नोएडा अथॉरिटी से मदद मांगी, तो उन्होंने उल्टा मुझ पर ही दीवार तोड़ने का आरोप लगा दिया.’
शादी होने वाली थी, बूढ़े पिता का सहारा छीन गया
मोनिंदर बताते हैं कि युवराज की अगले 2-4 महीनों में शादी होने वाली थी. उसके पिता की उम्र 65 साल से ऊपर है. वह कहते हैं, ‘मैं सच बोलता रहूंगा, चाहे मुझे जेल भेज दें. मैंने एक लाचार पिता को अपने बेटे के लिए टूटते हुए देखा है.’ मोनिंदर का परिवार भी उनके साथ खड़ा है. उनके भाई सोमिंद्र सिंह का कहना है कि मोनिंदर ने अपनी जान जोखिम में डाली क्योंकि वह उस बेबस पिता का दर्द नहीं देख पा रहे थे.
इस पूरे मामले पर फिलहाल नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. लेकिन स्थानीय निवासियों में भारी रोष है कि आखिर विकास के नाम पर खोदे गए इन ‘मौत के कुओं’ का जिम्मेदार कौन है?