सुल्तानपुर के 5 प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल, जिनसे जुड़ी हैं मान्यताएं

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सुल्तानपुर के 5 प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल, जिनसे जुड़ी हैं मान्यताएं


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हर स्थान का एक विशेष महत्व होता है लेकिन उस स्थान को विशेष बनाने में कुछ इमारतें कुछ व्यक्तित्व और कुछ हस्तियां महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं. ऐसे ही पांच तस्वीर आज हम साझा करने चल रहे हैं जिससे आपको सुल्तानपुर का ऐतिहासिक महत्व समझने का एक बेहतरीन अवसर मिलेगा तो आईए जानते हैं इन पांच तस्वीरों के माध्यम से कि आखिर सुल्तानपुर का क्या है ऐतिहासिक मह

अगर हम बात करें सुल्तानपुर के ऐतिहासिक महत्व के बारे में तो शहर के गोमती नदी के किनारे स्थित पारिजात का वृक्ष सुल्तानपुर को प्राचीन काल से ही स्थापित बताता है क्योंकि समुद्र मंथन में निकले 14 रत्न में एक रत्न पारिजात वृक्ष भी था जो सुल्तानपुर जिले में मौजूद है. सुल्तानपुर स्थित इस वृक्ष को उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य विरासत वृक्ष का दर्जा दिया है. ऐसी मान्यता पाने वाला यह वृक्ष जिले का इकलौता वृक्ष है. राज्य विरासत का दर्जा प्राप्त होने के बाद इस वृक्ष को संरक्षित और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रयास किया गया है.

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राणा प्रताप पी जी कॉलेज में इतिहास के प्रोफेसर डॉ प्रभात श्रीवास्तव ने लोकल 18 से बातचीत के दौरान बताया कि सुल्तानपुर प्राचीन काल से ही काफी महत्वपूर्ण रहा है, क्योंकि यहां पर रामायण काल और बौद्ध काल के काफी साक्ष्य मिलते हैं. सुल्तानपुर जिला प्राचीन इतिहास में काफी महत्वपूर्ण स्थान रखता है. सुल्तानपुर के कुड़वार ग्रैंट ग्राम सभा में स्थित गढ़ा स्थल गौतम बुद्ध के जीवन से संबंधित रहा है जो सुल्तानपुर के इतिहास का परिचय देता है.

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सुल्तानपुर शहर में गोमती नदी के किनारे स्थित सीताकुंड घाट एक ऐसा घाट है जो सुल्तानपुर की ऐतिहासिक धरोहर को संजोए हुए है. सनातन धर्मावलंबियों के लिए यह आस्था और भक्ति का केंद्र है. ये वही स्थल है जहां प्रभु श्रीराम ने वन जाने के दौरान सीता और लक्ष्मण के साथ रात्रि में विश्राम किया था. उत्तर प्रदेश के पर्यटन विभाग ने भी इसे मान्यता प्रदान की है

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सुल्तानपुर जिले के लंभुआ विधानसभा में गोमती नदी के किनारे एक धोपाप मंदिर है. जहां ऐसी मान्यता है कि प्रभु श्री राम ने रावण का वध करने के पश्चात यहां स्नान कर अपने पापों को धोया था क्योंकि रावण को मारने के पश्चात प्रभु श्री राम के ऊपर ब्रह्म हत्या का आरोप लगा था. ऐसी मान्यता है कि जिस व्यक्ति के पैर एक बार धोपाप धाम में पड़ जाते हैं उसके जन्म जन्मांतर के सारे पाप धुल जाते हैं. यहां पर एक मंदिर बनवाया गया है. जो सुल्तानपुर की ऐतिहासिक धरोहर को संजोकर रखे हुए है.

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विजेथुआ महावीरन धाम सूरापुर-सुलतानपुर में एक बहुत प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर है. इस स्थान की रामायण में अपनी एक अलग कथा है. इस जगह पर भगवान हनुमान जब लक्ष्मण के लिए संजीवनी लाने जा रहे थे तो उन्होंने दैत्य कालनेमि को मारा और विश्राम किया था. यहां स्थित मकर कुंड में भगवान हनुमान ने स्नान भी किया जो बिजेथुआ मंदिर के किनारे स्थित है. रावण ने भगवान राम के कार्य में बाधा डालने के लिए कालनेमि नाम के राक्षस को नियुक्त किया था. यहाँ पर मंगलवार और शनिवार को बहुत से लोग पूजा अर्चना के लिए आते हैं.



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