सुल्तानपुर में 300 साल पुराना रहस्यमयी कुआं, 10 फीट दूर से भी गूंजती है आवाज

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सुल्तानपुर में 300 साल पुराना रहस्यमयी कुआं, 10 फीट दूर से भी गूंजती है आवाज


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सुल्तानपुर जिले के बेदूपारा गांव में लगभग 300 साल पुराना ऐतिहासिक कुआं आज भी अपनी अनोखी खासियत के लिए जाना जाता है. 120 फीट गहरे इस कुएं में दूर से बोलने पर भी आवाज गूंजकर वापस आती है, जबकि इसकी नक्काशीदार दीवारें इसके प्राचीन वैभव को दर्शाती हैं. हालांकि देखरेख के अभाव में यह ऐतिहासिक धरोहर धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होती जा रही है.

सुल्तानपुर. जिले में ऐसे कई ऐतिहासिक स्थल है जो सुल्तानपुर को इतिहास से जोड़कर रखते हैं. इस तरह एक ऐसा प्राचीन कुंआ है जिसका इतिहास लगभग 300 साल पुराना है. यह उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में है जो सुल्तानपुर शहर मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर बेदूपारा गांव में स्थित है. इस कुएं की चौड़ाई सामान्य कुएं से अधिक है. दरअसल, हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के बेदूपारा ग्राम सभा की जहां पर एक तीन सौ वर्षो से भी अधिक पुराना कुआं मौजूद है. इस कुएं का ऊपरी ढांचा तो खंडहर हो चुका है लेकिन 120 फीट गहरे इस कुएं में पानी आज भी मौजूद है. यह दियरा राजवंश के राजाओं द्वारा बनवाया गया था. जिसका इतिहास काफी पुराना माना जाता है.

यह है इतिहास 
सुल्तानपुर शहर मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर ग्राम सभा बेदूपारा में भगवान‌ शंकर का एक शिवाला है और इस शिवाला के ठीक बगल एक गहरा लगभग 120 फीट कुआं भी है. इस कुएं को कोइरीपुर के जानकी शाह सेठ द्वारा बनवाया गया. कुएं में इस्तेमाल किए गए ईंट विशेष रूप से आकर्षक और मजबूत बनाए गए हैं.

उकेरी गई है नक्काशी 
इसी गांव के रहने वाले वरिष्ठ व ग्रामीण प्रमोद गिरी लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि अक्सर आपने कई कुओं में देखा होगा कि जब आप कुएं के नजदीक खड़े होकर बोलते हैं तो आपके द्वारा बोली गई आवाज उसमें गूंजती है और वह रिपीट होती रहती है. लेकिन इस कुएं की सबसे खास बात यह है कि कुएं के अंदर आवाज गूंजने के लिए आपको कुएं के नजदीक नहीं खड़ा होना होगा बल्कि आप लगभग 10 फीट दूर रहेंगे और आप कुछ बोलेंगे तब भी आपको कुएं के नीचे से आपकी आवाज दोबारा लौट कर वापस आएगी. इस कुएं की भीतरी दीवारों में कई तरह के नक्काशी और चित्र उकेरे गए हैं.

खंडहर हो रहा है कुआं 
लगभग 3 सौ वर्ष पुरानी इस कुएं का ऐतिहासिक महत्व सुल्तानपुर के लिए गर्व महसूस कराता है, उतना ही इसकी देखरेख और संरक्षण न हो पाना यह निंदनीय हो जाता है. इस ऐतिहासिक कुएं के ऊपर का ढांचा टूट चुका है, कुएं का चबूतरा भी खंडहर हो चुका है.  कुएं के चार पिलर भी अब धीरे-धीरे टूटे चले जा रहे हैं जिन पर ध्यान देने वाला कोई नहीं है.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें



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