स्वाद का खजाना है यह देसी मिठाई, एक बार चखने के बाद भूल नहीं पाएंगे इसका स्वाद
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Ballia News: स्थानीय व्यवसायी संजय कुमार ने कहा कि, खजूली की मांग न केवल बलिया या आसपास के जिलों में है, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों जैसे गुजरात, मुंबई, असम और दिल्ली आदि तक फैली हुई है. खजूली मिठाई की सबसे बड़ी खासियत, यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ लंबे समय तक खराब नहीं होती हैं.
बलिया: भला ऐसा कैसे हो सकता कि मिठाइयों की बात हो और बलिया की देसी मिठास का जिक्र न हो… बलिया की मिठाइयों में खजूली का इतिहास पुराना है. स्थानीय दुकानों पर यह मिठाई सालों से लगातार तैयार होती आ रही है. यहां की पारंपरिक मिठाई खजूली अपने लाजवाब स्वाद और लंबे समय तक खराब न होने की वजह से काफी मशहूर और लोकप्रिय बन गई है. मैदा और गुड़ से बनने वाली यह मिठाई बलिया की पहचान बन चुकी है. इसका स्वाद इतना खास है कि यकीन मानिए एक बार खाने के बाद आप भी इसके स्वाद के दीवाने हो जाएंगे.
खजूली मिठाई बनाने की रेसिपी
खजूली मिठाई को बनाने की बात करें, तो इसकी प्रक्रिया आसान जरूर है, लेकिन इसमें हुनर और धैर्यता की जरूरत होती है. सबसे पहले मैदा को अच्छे से गूंथकर उसकी परतें तैयार की जाती हैं. इन परतों को हल्के हाथों से बेलकर तेल में तला जाता है. तलते समय ये परतें फूलकर कुरकुरी हो जाती हैं. इसके बाद इन्हें गुड़ की गाढ़ी चाशनी में डुबोया जाता है, जिससे इसका स्वाद मीठा और सुगंधित बन जाता है. गुड़ में बनने से यह ज्यादा नुकसानदायक भी नहीं होती है.
सही अनुपात और धीमी आंच पर होती है तैयार
गुड़ की मिठास और मैदे की कुरकुराहट के मेल से तैयार यह मिठाई हर किसी को ललचाती है. दुकानदार ने बताया कि सही अनुपात और धीमी आंच पर पकाना इसका असली राज है. यह एक ऐसी परंपरा है, जो स्वाद और संस्कृति दोनों को एक ही साथ लेकर चल रही है. अगर इस खजूली मिठाई के स्वाद का आनंद आप भी लेना चाहते हैं, तो बलिया के रेलवे स्टेशन से NH 31 पर स्थित माल गोदाम चौराहे के पास संजय कुमार गुप्ता की दुकान पर आ सकते हैं. यहां इस मिठाई के साथ अन्य देसी मिठाइयां भी आपको देखने और खाने को मिल जाएंगी.